छिंदवाड़ा 
आसाराम के बेटे नारायण साईं को गुजरात के सूरत स्थित आश्रम में दो बहनों से दुष्कर्म के मामले में सेशंस कोर्ट ने मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. पीड़िता नारायण साईं के आश्रम की साधिका थी, उसने नारायण साईं पर आश्रम में ही रेप करने का आरोप लगाया था. पीड़िता का ये भी आरोप था कि नारायण साईं की ओर से उसे और उसके पिता पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और जान से मारने की धमकियां भी दी जा रही थीं.

नारायण साईं और उसके पिता आसाराम के देश के कई राज्यों में आश्रम हैं. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आश्रम में रहने वाली नाबालिग लड़की ने आसाराम पर रेप करने का आरोप लगाया था. जिसके चलते आसाराम को भी सजा सुनाई गई थी. दरअसल, छिंदवाड़ा स्थित आश्रम में नाबालिग का यौन शोषण करने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. उनके दो सहयोगियों शिल्पी और शरद को भी 20 साल की सजा सुनाई गई थी.

छिंदवाड़ा आश्रम में रह रही नाबालिग लड़की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली थी. पिछले साल अप्रैल महीने में उस मामले में जोधपुर की विशेष एससी-एसटी अदालत आसाराम को दोषी करार दिया था. आसाराम जोधपुर में आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रहा है. मामले में आसाराम के साथ ही उसके दो सहयोगियों शिल्पी और शरद को भी 20 साल की सजा सुनाई गई थी.

और अब नारायण साईं को भी रेप केस में ही सजा सुनाई गई है. इस मामले में नारायण साईं ने सूरत की रहने वाली एक महिला का रेप किया था. पीड़िता ने अक्‍टूबर, 2013 में नारायण साईं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके बाद नारायण साईं को उसी साल दिसंबर में हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पीपली इलाके से गिरफ्तार किया गया था.

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