जबलपुर 
प्रतिभास्थली जबलपुर की 12वीं कक्षा की छात्राओं ने शत-प्रतिशत परिणामों के साथ सफलता का परचम लहराया। गुरु कृपा से बाँसुरी बना मैं तो ठेठ बाँस था। साक्षात् तीर्थंकर स्वरूप आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित प्रतिभास्थली की 12वीं कक्षा की 74 छात्राओं ने उत्तीर्ण होकर एक नया इतिहास बनाया है। 12 छात्राओं ने 90-96% अंक प्राप्त कर प्रतिभास्थली की विजय पताका फहराई है।

  • वाणिज्य संकाय में- कु. शुभ्रा जैन-96%
  • कला संकाय में- कु. कशिश जैन-94.2%
  • विज्ञान संकाय में- कु. अंशिका जैन-92%

अंकों के साथ प्रथम स्थान पर रही हैं। कु. देशना जैन ने मनोविज्ञान विषय में 100 अंक , कु. शुभांगी जैन ने गृहविज्ञान विषय में 99 अंक प्राप्त किये हैं। आचार्य श्री जी का सभी को शुभाशीष व प्रतिभस्थली परिवार की शुभकामनाएँ।

मन के मंतव्य को मिला गंतव्य
जिनकी अंदर आती श्वास आत्मकल्याण के लिए और बाहर आती श्वास परकल्याण के लिए होती है ऐसे स्वपरहितकारी राष्ट्रचिंतक आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अंतर भावों ने आकार लिया और दयोदय की धरा पर गौधाम के साथ-साथ आरोग्यधाम और विद्यालय के साथ-साथ चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना का संकल्प लिया गया। आचार्य श्री जी की सततप्रेरणा, आशीर्वाद और उनकी साक्षात् सन्निधि ने नर्मदा के तट पर शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलम्बन रूपी त्रिवेणी की निर्मल धारा प्रवाहित की है।
 
औषधालय को मिली पहचान- "पूर्णायु"
दयोदय की भूमि पर नवोदित औषधालय को गुरूमुख से नया नाम मिला- "पूर्णायु आयुर्वेदिक औषधालय"
नाम मिलते ही जय-जयकारों के नारों से वातावरण गुरूमय हो गया। संरक्षिणी सभा के निवेदन पर समस्त समाज के सामने गुरूजी ने इस संस्थान को नयी पहचान देते हुए कहा- "ये औषधालय मानव मात्र को उसकी पूर्णायु तक पहुँचाने का तन मन धन से पुरुषार्थ करेगा ऐसी मेरी भावना है।"

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