शास्त्रों में श्रीयंत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ये माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय होता है। कहते हैं कि इसे घर में स्थापित करने से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलता है और साथ ही आर्थिक समस्या भी दूर होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि इसे वास्तु शास्त्र के हिसाब से भी शुभ माना जाता है। कई लोग जो वास्तु के हिसाब से चलते है तो वे श्रीयंत्र के गुडलक के तौर पर अच्छा मानते हैं और इसे घर में रखते हैं।

श्रीयंत्र के सबसे ऊपर वाली जगह को महत्रिपुर सुंदरी कहा जाता है। इसका अर्थ है सभी देवी और देवताओं का निवास स्‍थान। इसकी चोटी पर हिंदू धर्म के सभी देवी और देवताओं का वास माना जाता है और इस एक वजह से ही यह मां लक्ष्‍मी को अतिप्रिय है। इसे स्थापित करने के कुछ नियम वास्तु में बताए गए हैं, अगर उन्हें अपनाकर इसे स्थापित करेंगे तो आपको ज्यादा फायदा होगा। 

श्रीयंत्र को रखने से पहले इसे 24 घंटों तक नमक के पानी में भिगोकर रखें और उसके बाद इसे बहते हुए पानी से साफ करना चाहिए। उसके बाद उसे अपने घर के मंदिर में स्थापित कर लें। 

श्रीयंत्र एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण, लाभकारी और शक्तिशाली यंत्र माना जाता है। जोकि न सिर्फ लाभ देता है बल्कि ये घर में सकारात्‍मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि आप किसी अपने को दिल से चाहते हैं और उसकी संपन्‍नता के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं तो उसे उपहार के रूप में श्रीयंत्र भी भेंट कर सकते हैं। यह श्रीयंत्र उस व्‍यक्ति की जिंदगी से जुड़ी समस्‍याओं को हल करने में मददगार साबित होता है और उस स्‍थान की सारी नकारात्‍मक ऊर्जा को भी दूर कर देता है।

वास्तु के अनुसार क्रिस्टल श्रीयंत्र संपूर्ण ब्रह्मांड में नकारात्‍मक और सकारात्‍मक ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने का काम करता है। क्रिस्‍टल में एक प्रकार की दिव्‍य शक्ति होने के कारण यह धन और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी लाभकारी समझा जाता है। इसे आप अपने घर के मंदिर, ऑफिस, लॉकर और अन्‍य पूजास्‍थल में भी रख सकते हैं। 

Source : Agency