भारत में डायबीटीज से बहुत तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि डायबीटीज से बचाव की पूरी जानकारी हमें होनी चाहिए। बताते चलें कि डायबीटीज टाइप 1 और टाइप 2 दो तरह की होती है। दोनों में ही शरीर में ब्‍लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। डायबीटीज टाइप 1 (मेलेटस) में पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं और इस तरह इंसु‍लिन का बनना संभव नहीं होता है। डायबीटीज मेलेटस जेनेटिक, कुछ वायरल संक्रमण आदि के कारण हो जाता है। इसके चलते बचपन में ही बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं।

इंसुलिन के बारे में जानें
हम जो खाते हैं उसी से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। हमारा शरीर भोजन को पचाकर उससे निकली शुगर को ऊर्जा में बदलता है। इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का बहुत योगदान होता है। इंसुलिन हमारे शरीर में बनने वाला एक हॉर्मोन है जो हमारे ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। यह हमारे शरीर में अग्‍नाशय या पैंक्रियाज नामकी एक ग्रंथि में बनता है। इसके असर से खून में मौजूद शुगर हमारे शरीर की कोशिकाओं में स्‍टोर हो जाती है। डायबीटीज में या तो हमारे शरीर में इंसुलिन बनता ही नहीं है या हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं और शुगर उनमें स्‍टोर न होकर खून में मौजूद रहती है।

जटिलताएं
1- हाई ब्लड शुगर लेवल के चलते शरीर के विभिन्न भागों के लिए नुकसान पहुंच सकता है।
2- दिल का दौरा पड़ने के खतरे की आशंका बढ़ जाती है।
3- आंखों की समस्याएं हो सकती हैं।
4- स्किन पर संक्रमण हो सकता है।
5- गुर्दे का खराब होने की आशंका रहती है।

दिखने लगते हैं ये लक्षण
-मरीज में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और उसे बार-बार पेशाब आता है।
-मरीज के शरीर से अधिक तरल पदार्थ निकलने के चलते बहुत प्यास लगने लगती है।
-मरीज के शरीर में पानी की कमी भी हो जाती है।
-मरीज को बहुत कमजोरी महसूस होती है।
-मरीज की दिल की धड़कन बहुत बढ़ जाती है।

Source : Agency