भारत में शिक्षा को केवल नंबरों और ग्रेड प्‍वाइंट तक ही सीमित कर दिया गया है जबकि शिक्षा प्राप्‍त करने से पूरी दुनिया के बारे में जानने का मौका मिलता है। यह विश्‍व एवं समाज के बारे में ज्ञान अर्जित करने का एक माध्‍यम है।

गर्मियां तो आ ही रही हैं लेकिन इसके साथ ही बच्‍चों के रिजल्‍ट की चर्चा भी जोर पकड़ चुकी है। सभी पैरेंट्स को अपने बच्‍चों के परीक्षा में आने वाले अंकों की चिंता सता रही है। लोगों का मानना है कि परीक्षा में आए अंक और ग्रेड ही किसी विद्यार्थी की योग्‍यता का प्रमाण दे सकते हैं।


मगर गौर करने वाली बात ये है कि इस तरह की सोच मेह कितनी गहराई है और ये कहां तक सत्य है। क्या किसी बच्‍चे की योग्‍यता परीक्षा में उसके द्वारा लाए गए अंकों या ग्रेड से मापी जा सकती है? क्‍या परीक्षा में अच्‍छे नंबर लाने से हम अपने जीवन की समस्‍याओं को आसानी से सुलझाने या उनका सामना करने में सक्षम हो पाते हैं।

जीवन का दायरा बहुत बड़ा है और शिक्षा तो केवल उसका एक अभिन्‍न हिस्‍सा है। हर अभिभावक को ये समझना होगा कि परीक्षा के अंकों के आगे भी एक दुनिया है।

जीवन के लिए किस चीज का ज्ञान ज्यादा जरूरी है
हर बच्‍चे एवं छात्र को जीवन में आने वाली मुश्किलों एवं भावनात्‍मक अड़चनों को दूर करना सीखना चाहिए। इससे वो मुश्किल समय में भी हार नहीं मानेगा और उसका सामना करने के लिए खुद रास्ते की खोज करेगा।

नौकरी
अगर आप अपने बच्‍चे को स्‍कूल और कॉलेज की पढ़ाई लिखाई से ज्‍यादा कुछ सिखाना चाहते हैं तो उसके लिए इंटर्नशिप के भरपूर अवसर मौजूद हैं। इससे उसे जीवन में कई सीख भी मिलेंगी और पढ़ाई के बाद नौकरी के क्षेत्र में कदम रखने से पहले ही उसे काफी अनुभव भी मिल सकेगा।

टैलेंट की ताकत
हम सभी को अपनी ताकत के बारे में जरूर पता होना चाहिए लेकिन असलियत में हम अपनी सीमाओं में ही उलझे रहते हैं और अपनी योग्‍यता को नजरअंदाज कर देते हैं। अपने बच्‍चे की ताकत और उसकी प्रतिभा को समझें एवं उसे निखारने में मदद करें ताकि दुनिया को भी इसका लाभ मिल सके। ऐसा करके आप उसका आत्मविश्वास भी बढ़ते हैं।

दूसरी चीजों पर भी दें ध्‍यान
बच्‍चे को पढ़ाई और स्‍कूल के अलावा भी अन्‍य चीजों में दिलचस्‍पी रखना सिखाएं। क्रिएटिव आर्ट, खेलकूद, खाने से जुड़ी कलाएं, थिएटर सहित कई रचनात्मक कलाओं में भी करियर के विकल्प मौजूद हैं। कॉलेज में इन सभी चीजों में से किसी एक को अपने करियर के लिए चुनने का मौका मिल सकता है।
 

माता पिता समझे बच्चे का विकास है जरूरी
पैरेंट्स को ये बात समझनी चाहिए कि परीक्षा में नंबर लाना ही सब कुछ नहीं होता है। उन्‍हें अपने बच्‍चों को बेहतर बनाने के लिए कुछ अच्‍छा सिखाने की कोशिश करनी होगी। इससे उनके व्‍यक्‍तित्‍व का भी विकास होगा।

बोर्ड के बाद शुरू होती है असली परीक्षा
10वीं और 12वीं के बाद कोई नहीं पूछता कि बोर्ड परीक्षा में कितने अंक आए थे। मगर इस पड़ाव के बाद ही बच्चों की असली परीक्षा शुरु होती है जिसके लिए पढ़ाई और नंबरों की नहीं बल्कि कौशल और आत्‍मविश्‍वास की जरूरत होती है। अपने बच्‍चों को इन सब चीजों से बाहर निकलकर ज्‍यादा से ज्‍यादा नया और बेहतर सीखने के लिए प्रेरित करें।

 

Source : Agency