बदरीनाथ।

आज प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में बदरीनाथ धाम के कपाट आम भक्‍तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इस मौके पर मंदिर को बड़े ही खूबसूरत ढंग से फूलों से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्‍चारण के बीच पूरे विधि विधान के साथ पूजापाठ की गई और फिर सुबह करीब साढ़े 4 बजे मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इस मौके पर हजारों की संख्‍या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे। वहीं गढ़वाल स्‍काउट की टीम ने बेंड की धुन के साथ इस समारोह की रौनक बढ़ाई
शीतकाल में बंद हो जाते हैं कपाट 
बीते वर्ष 20 नवंबर को बदरीनाथ के कपाट 6 महीने के लिए बंद कर दिए गए थे। शीतकाल के दौरान भारी बर्फबारी और ठंड की चपेट में रहने के कारण भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम सहित उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित चारों धामों के कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिये बंद कर दिये जाते हैं जो छह माह के शीतकाल के बाद दोबारा अप्रैल-मई में खुलते हैं।
बदरीनाथ धाम का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ऋषि भगीरथ की तपस्या के फलस्वरूप स्वर्ग की नदी मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण होना था तो उनका वेग बहुत अधिक था। इस वेग से पृथ्वी तहस-नहस हो सकती थी। इसे कम करने के लिए भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में स्थान दिया। लेकिन तब भी इसका वेग अधिक था, इस पर गंगा 12 अलग-अलग धाराओं विभाजित हुईं और इन नदियों को अलग-अलग नाम दिए गए। अलकनंदा भी इन्हीं में से एक नदी है। जिसके तट पर बदरीनाथ धाम स्थित है। फिर पृथ्वी गोमुख से गंगा का उद्गम हुआ।

ऐसे पहुंचें बदरीनाथ धाम
यहां पहुंचने के लिए आप देश के किसी भी हिस्से से पहले ऋषिकेश पहुंचें। ऋषिकेश तक की यात्रा आप रेलमार्ग या सड़क मार्ग से कर सकते हैं। हवाई यात्रा करनी है तो सबसे नजदीकी एयर पोर्ट देहरादून का जौलीग्रांट एयरपोर्ट है। इसके बाद आप उत्तराखंड स्थित श्रीनगर होते हुए रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, जोशी मठ धाम की यात्रा करते हुए बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं।

Source : Agency