देश में लागू आचार संहिता के उतरते ही राज्य के तीन विवि के कुलपति राज्य सरकार के हत्थे चढ़ने वाले हैं। कुलपतियों के खिलाफ बैठी जांच अंतिम चरणों तक पहुंंच चुकी है। आचार संहिता खत्म होते-होते रिपोर्ट भी शासन की टेबिल पर पहुंच जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद शासन कुलपतियों को हटाने के लिए अपनी तरफ से उचित कार्रवाई करने बेहतर तरीके अपना रहा है।

देवी अहिल्या विवि इंदौर, विक्रम विवि उज्जैन और भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपतियों को खिलाफ शासन ने जांच कमेटियां बना दी हैं, जिनकी रिपोर्ट जल्द ही शासन के पास पहुंच जाएगी। डीएविवि इंदौर के कुलपति खिलाफ नियमों को नजरअंदाज करने के बाद नियुक्तियां कर रहे थे। वहीं भोज मुक्त विवि के कुलपति जयंत सोनवलकर ने पीएचडी में फर्जीवाड़ा किया था। वहीं विक्रम विवि उज्जैन के कुलपति बालकृष्ण शर्मा की डीनशिप पर सवाल खड़े हुए हैं। उक्त तीनों कुलपतियों की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। लोकसभा चुनाव के कारण आचार संहिता देशभर में लागू है। इसलिए शासन उक्त कुलपतियों के खिलाफ रिपोर्ट आने के बाद भी एक्शन नहीं ले पाएगा। इसलिए शासन को भी आचार संहिता खत्म होने का इंतजार है। आचार संहिता खत्म होने ज्यादा समय नहीं बचा है। आचार संहिता खत्म होते रिपोर्ट भी तैयार होकर शासन के पास पहुंच जएगी।
डीएविवि के कुलपति नरेंद्र धाकड़ को हटाने शासन ने जांच कमेटी बनाई थी, जिसमें एडी इंदौर एनके चतुर्वेदी, भोज विवि रजिस्ट्रार एचएस त्रिपाठी और डीआर आरके बघेल को रखा गया था। उनकी रिपोर्ट शासन को पहुंच गई है। कुलपति धाकड़ ने भर्तियों की गई अनियमितताएं कर मप्र विवि अधिनियम 1973 का उल्लंघन किया है। इसे लेकर एक जांच कमेटी दोबारा बनाई गई। इसमें संस्कृति विवि उज्जैन के रजिस्ट्रार एलएस सोलंकी, भोज विवि के रजिस्ट्रार एचएस त्रिपाठी और दो बार कुलपति रहे राम राजेश मिश्र को शामिल किया गया है। मिश्र वर्तमान में हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष के तौर पर कार्य कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट भी शासन के पास जल्द ही प्रस्तुत हो जाएगी। कुलपति धाकड़ ने संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर को भर्ती कराने के लिए साक्षात्कार के रखे थे,जिसके रिजल्ट जारी होने वाले थे। तत्कालीन प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने उनके रिजल्ट पर रोकने के आदेश जारी कर दिए थे। इसके बाद जांच कमेटियां गठित की गर्इं।  

विक्रम विवि में एसएस पांडे का इस्तीफा होने के बाद राजभवन ने बालकृष्ण शर्मा को कुलपति नियुक्त किया है। कुलपति शर्मा को हटाकर उनके स्थान पर शासन अपना कुलपति बैठाना चाहती है, जिसके लिए भी तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इसमें भी एडी उज्जैन के साथ भोज विवि रजिस्ट्रार एचएस त्रिपाठी को रखा है। ये कमेटी भी अपनी रिपोर्ट शासन को जल्द ही सौंपेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय शासन लेगा। हालांकि उनकी नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में प्रकरण लंबित है। इसमें हाईकोर्ट ने राजभवन से जवाब तलब किया है।

कुलपति की पीएचडी की जांच

भोज विवि के कुलपति जयंत सोनवलकर के खिलाफ पीएचडी में कापी करने की शिकायत शासन से की गई थी। इसलिए शासन ने भोपाल संभाग की संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव को जांच का दायित्व सौंपा है। उन्होंने भी कुलपति सोनवलकर की जांच करने की व्यवस्था जमा दी है। उनके द्वारा कराई जा रही जांच भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। ये रिपोर्ट माह के खत्म होने तक शासन के पास पहुंच जाएगी।

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