मुंबई
चीन की करंसी युआन पर वॉल स्ट्रीट के बेयरिश होने से रुपये की भी शामत आ सकती है। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर तेज होने से रुपया रेकॉर्ड निचले स्तर की तरफ बढ़ रहा है। आमतौर पर चीन और भारत की मुद्रा में एक जैसा उतार-चढ़ाव होता है क्योंकि दोनों देशों के बीच एक्सपोर्ट मार्केट को लेकर प्रतिस्पर्धा रहती है। 
 
पिछले साल ट्रेड वॉर जैसे हालात में युआन में 11 मई से 31 अक्टूबर के बीच 10 पर्सेंट की गिरावट आई थी और डॉलर की तुलना में रुपया भी इतना ही कमजोर हुआ था। भारत में निवेश करने वालों को लग रहा है कि फिर से वैसा ही होने जा रहा है। पिछले साल 11 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबला रुपया 74.48 के रेकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। 

इस बारे में यूनाइटेड फाइनैंशल्स के संस्थापक के एन डे ने बताया, 'युआन और रुपये की वैल्यू के बीच एक्सपोर्ट की वजह से सीधा रिश्ता है। अगर युआन की वैल्यू में उतार-चढ़ाव होता है तो रुपया उससे बेअसर नहीं रह सकता। अगर चीन की करंसी कमजोर होती है और रुपये की वैल्यू उसके मुताबिक नहीं गिरती तो देश के निर्यातकों को नुकसान होगा। मुझे लग रहा है कि रुपया कमजोरी का नया रेकॉर्ड बना सकता है कि क्योंकि डॉलर के मुकाबले युआन में कमजोरी आ रही है।' 

उन्होंने बताया कि अगर किसी आयातक को विदेशी करंसी में भुगतान करना है तो उसे तुरंत हेजिंग कर लेनी चाहिए। डे ने बताया कि अगले चार से आठ हफ्तों के बीच रुपये में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है। रुपया मंगलवार को 70.44 पर बंद हुआ। इस महीने की शुरुआत से रुपये में करीब 2 पर्सेंट की गिरावट आई है, जबकि युआन में इससे कुछ अधिक कमजोरी आई है। 

सिंगापुर के डीबीएस बैंक के मार्केट्स हेड आशीष वैद्य ने कहा, 'चीन में आर्थिक मंदी की वजह से अगर युआन की वैल्यू घटती है तो रुपये पर भी उसका असर होगा। पिछले साल की तरह इस साल भी रुपये पर वैश्विक कारकों की वजह से दबाव बन सकता है। हालांकि, अगर केंद्र में स्थायी सरकार बनती है तो इससे भारत की मैक्रो-इकॉनमी के लिए अच्छे हालात बनेंगे। तब रुपया कुछ स्थिर रह सकता है।' 

डॉलर के मुकाबले रुपये में सोमवार को एक दिन में चार महीने की सबसे बड़ी गिरावट आई थी। वहीं, विदेशी मार्केट्स में युआन पिछले साल दिसंबर के बाद पहली बार 6.9 के स्तर को पार कर गया था। मई में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के सामान पर आयात शुल्क 10 पर्सेंट से बढ़ाकर 25 पर्सेंट करने का फैसला किया था। पिछले साल भी टैरिफ रेट्स की वजह से ही दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा था। 

कोटक सिक्यॉरिटीज के करंसी ऐनालिस्ट अनिंद्य बनर्जी ने बताया, 'अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर के चलते करंसी मार्केट में उथल-पुथल बढ़ेगी। रुपया धीरे-धीरे रेकॉर्ड लो लेवल की तरफ बढ़ रहा है। भारतीय करंसी पर चुनाव संबंधी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने से भी बुरा असर पड़ रहा है।' विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने 2,555 करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि एक महीना पहले उन्होंने 16,728 करोड़ का निवेश किया था। 
 

Source : Agency