बैतूल 
बैतूल लोकसभा सीट बीजेपी का एक अभेद किला है. इस सीट पर पिछले सात बार से बीजेपी का ही कब्जा है. पिछले 28 साल से कांग्रेस यहां एक अदद जीत के लिए तरस रही है. बैतूल लोकसभा सीट परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुई. परिसीमन के बाद खंडवा की हरसूद विधानसभा भी इसमें जोड़ी गई. बीजेपी के दिग्गज नेता विजय कुमार खंडेलवाल यहां से 4 बार जीतकर संसद पहुंच चुके हैं. पिछले दो चुनावों से बीजेपी की ज्योति धुर्वे ही यहां से जीतती आ रही हैं. बैतूल लोकसभा सीट बैतूल-हरदा-हरसूद लोकसभा सीट के नाम से भी जानी जाती है.

बैतूल लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1951 में हुआ. पहले चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली. 1967 और 1971 के चुनाव में भी इस सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की. 1977 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के साथ निकल गई और भारतीय लोकदल ने पहली बार यहां पर जीत हासिल की. हालांकि 1980 में कांग्रेस ने यहां पर वापसी की और गुफरान आजम यहां के सांसद बने. इसके अगले चुनाव 1984 में भी कांग्रेस को जीत मिली. बीजेपी ने पहली बार यहां पर जीत 1989 में हासिल की. आरिफ बेग ने कांग्रेस के असलम शेरखान को हराकर यहां पर बीजेपी को पहली जीत दिलाई.

इसके अगले चुनाव 1991 में असलम शेरखान ने 1989 की हार का बदला लिया. उन्होंने इस चुनाव में आरिफ बेग को मात दे दी. 1996 में बीजेपी ने यहां पर फिर वापसी की और विजय कुमार खंडेलवाल यहां के सांसद बने. 1996 में यहां पर वापसी करने के बाद से ही यह सीट बीजेपी के पास है. विजय कुमार खंडेलवाल ने 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनाव में जीत दर्ज की.

विजय कुमार खंडेलवाल के निधन के बाद 2008 में यहां पर उपचुनाव हुआ. उपचुनाव में विजय कुमार खंडेलवाल के बेटे हेमंत खंडेलवाल जीतकर यहां के सांसद बने. परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हो गई. 2009 में बीजेपी ने महिला कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारा. बीजेपी खेमे से ज्योति धुर्वे ने मोर्चा संभाला और वो पार्टी की उम्मीदों पर खरी उतरीं.

2014 में बीजेपी ने एक फिर ज्योति धुर्वे पर ही भरोसा जताया. पिछली बार जीत का अंतर 97 हजार 317 था, लेकिन 2014 में बैतूल लोकसभा सीट से पहली महिला सांसद ज्योति धुर्वे ने रिकार्डतोड़ मतों से जीत हासिल की.

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