भोपाल
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा एवं कांग्रेस में संगठनात्मक रूप से बड़ा हेर-फेर होने की संभावना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जहां पद से इस्तीफा देंगे। वहीं भाजपा में संगठन महामंत्री सुहास भगत से लेकर कई प्रदेश पदाधिकारियों की छुट्टी होगी और दायित्व बदलेंगे। अगले कुछ महीनों के भीतर दोनों दलों में संगठन का नया ढांचा खड़ा किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद वे विधानसभा के सदस्य हो जाएंगे। अभी वे मुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस की कमान भी संभाल रहे हैं। संभवत: लोकसभा चुनाव के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे। हालांकि अगला पीसीसी अध्यक्ष कौन होगा, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस संगठन का प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक नया ढांचा खड़ा होगा। खास बात यह होगी कि संगठन में ज्यादा से ज्यादा संख्या में युवाओं को शामिल किया जाएगा। मौजूदा वरिष्ठ पदाधिकारियों को वरिष्ठ मंडल में शामिल किया जाएगाा। कांग्रेस की कोशिश है कि अगले चुनाव तक प्रदेश में संगठन को मजबूती के साथ खड किया जाए।

इसी तरह प्रदेश भाजपा में भी कई पदाधिकारियों को बदला जाएगा। विधानसभा चुनाव की हार के बाद राकेश सिंह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन हाईकमान ने निकट भविष्य में लोकसभा चुनाव होने की वजह से राकेश को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा। विधानसभा चुनाव के बाद हाईकमान ने सह संगठन मंत्री रहे अतुल राय को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। साथ ही संगठन महामंत्री सुहास भगत को सिर्फ बैठकों तक सीमित कर दिया था। संभवत: चुनाव बद नया संगठन मंत्री की तैनाती की जाएगी। पूर्व में संघ के कुछ पदाधिकारियों का नाम भाजपा का संगठन मंत्री बनने के लिए चला भी था। इसी तरह प्रदेश में अन्य पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की जाएगी।

राकेश ने नहीं बदली थी टीम

भाजपा हाईकमान ने अप्रैल 2018 में नंदकुमार चौहान को हटाकर राकेश सिंह को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी थी। अध्यक्ष बनने के बाद राकेश सिंह ने नंदकुमार चौहान की टीम के किसी भी पदाधिकारियों को बााहर का रास्ता नहीं दिखाया। विधानसभा चुनाव के दौरान एवं लोकसभा चुनाव से पहले कुछ जिलों के अध्यक्षों को बदला था। राकेश सिंह नंदकुमार चौहान की टीम के भरोसे ही काम कर रहे थे। हालांकि भाजपा इससे पहले विधानसभा हार गई। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को नुकसान की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री बने तो देंगे इस्तीफा

राकेश सिंह जबलपुर से तीसरी बार लगातार सांसद रह चुके हैं। वे चौथी बाद सांसद चुने जाते हैं। केंद्री में भाजपा सरकार आने पर वे मप्र कोटे से कैबिनेट मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में राकेश सिंह प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी से इस्तीफा देंगे। पिछली बार नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रदेशाध्यक्ष रहते लोकसभा चुनाव लड़ा था। तब तोमर केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए गए। इसके कुछ महीनों बाद उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तब नंदकुमार चौहान को प्रदेश की कमान सौंपी गई। 

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