भोपाल
मध्यप्रदेश की 21 लोकसभा सीटों पर मतदान हो चुके है और बाकी बची 8  सीटों पर 19  मई को वोटिंग होना है।21  सीटों में से कईयों पर इस बार बंपर वोटिंग हुई, जिससे प्रत्याशियों के दिलों की धड़कने भी तेज हो चली है। हालांकि परिणाम 23  को आना है, लेकिन इसके पहले दो बूथों में 50 -50- वोट बढ़ने का मामला सामने आया है।जिसके चलते प्रदेशभर में हड़कंप मच गया है। वही आयोग के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई है। अधिकारियों को समझ ही नही आ रहा है कि इन ईवीएम की मतगणना कैसे कराएं? 

दरअसल,  श्योपुर के 649 पोलिंग बूथ में से दो बूथों की ईवीएम में 50-50 वोट बढ़ गए हैं। दोनों ईवीएम श्योपुर विधानसभा की हैं। पहली ईवीएम श्योपुर शहर के बूथ क्रमांक 169 की है। इस बूथ पर 248 पुरुष और 190 महिलाओं ने मतदान किया, यानी पोलिंग बूथ पर कुल 438 मतदाता वोट डालने आए थे, लेकिन ईवीएम 438 की बजाय 488 वोट बता रही है। यानी 50 वोट ज्यादा बढ़ गए हैं।वही दूसरी पांडोला के बूथ क्रमांक 263 की है। श्योपुर से 10 किमी दूर पांडोला गांव के इस बूथ पर 225 पुरुषों और 205 महिलाओं यानी 430 मतदाताओं ने वोट डाला, लेकिन मतदान समाप्त होने के बाद जब ईवीएम के वोटों का टोटल चेक हुआ तो, पांडोला के इस बूथ की ईवीएम ने 480 वोट बताए। यानी यहां भी 50 वोट बढ़ गए।

इस घटनाक्रम के बाद प्रदेशभर में ह़ड़कंप मच गया है।इसमें मुख्य स्तर पर  पीठासीन अधिकारी और निर्वाचन ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है । बताया जा रहा है कि मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हुआ था, लेकिन इससे एक घंटे पहले यानी सुबह 6 बजे से हर पोलिंग बूथ पर मॉकपोल हुआ था। मॉकपोल में हर ईवीएम से 50-50 वोट डाले गए। बाद में जब मतदान शुरू हुआ तो मॉकपोल के वोट सीएलआर बटन दबाकर डिलीट करने थे, लेकिन श्योपुर व पांडोला के बूथ पर मॉकपोल के बाद सीएलआर बटन नहीं दबाई। इस कारण मॉकपोल के 50 वोट ईवीएम से नहीं हटे और मतगणना शुरू होने के बाद मॉकपोल के 50 वोट अन्य मतदान में मिल गए।

वही अफसरों के भी हाथ पांव फूल गए है, उन्हें समझ नही आ रहा है कि वोट बढ़े तो बढ़े कैसे और अब  इन ईवीएम की मतगणना कराएं तो कराएं कैसे। अफसरों द्वारा लगातार इसका समाधान निकाला जा रहा है। वही इस मामले में कलेक्टर बसंत कुर्रे ने सामान्य प्रेक्षक विवेक वाष्णेय से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर सुझाव मांगा है।हालांकि वीवीपैट की पर्चियां से इस समस्या को सुलझाया जा सकता है लेकिन इसके लिए पहले प्रत्याशियों से चर्चा करनी होगी, इसके बाद आगे की प्रक्रिया की जा सकेगी।

बता दे कि मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मौका दिया है, वही कांग्रेस ने कद्दावर नेता रामनिवास रावत को मैदान में उतारा है। यह दोनों विधानसभाएं इसी लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। खास बात ये है कि दोनों नेता 2009 के बाद एक बार फिर 2019 में आमने-सामने हुए है। मुकाबला रोमांचक रहा और परिणाम भी रोचक होने वाले है।

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