नई दिल्ली
हाल ही में समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में बरी हुए स्वामी असीमानंद ने कहा कि हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ा गया, उन्हें हिंदू और भगवा आतंकवाद का प्रतीक बना दिया गया था। लेकिन एक के बाद एक तीनों ही ब्लास्ट मामलों से वह बरी हुए। उनका बरी होना न सिर्फ उनके लिए बल्कि हिंदू व भगवा आतंकवाद की धारणा को भी खत्म करता है।

मैं पश्चिम बंगाल से हूं। वहीं मेरी पढ़ाई लिखाई हुई। वहां की यूनिवर्सिटी से मैने एमएससी (फिजिक्स) की पढ़ाई की। फिर मैं राम कृष्णन परमहंस आश्रम में जाने लगा वहां विवेकानंद के सिद्धांत से प्रभावित हुआ। स्वामी परमानंद से दीक्षा ली और फिर वहां मेरा नाम स्वामी असीमानंद रखा गया। इससे पहले मेरा नाम नव कुमार सरकार था। मै जनजातियों की सेवा में लग गया। इस दौरान पता चला कि जनजाति समुदाय के लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। मैने उनके बीच हिंदुत्व के बारे में जागरुकता पैदा की और लोगों ने घर वापसी शुरू कर दी। इसके साथ ही मैने धर्म परिवर्तन का विरोध किया। इसी कारण मुझे झूठे मामले में तत्कालीन सरकार ने फंसाना शुरू किया।

ऐसा नही है कि मै कभी भी छिपा। मैं तो अपने आश्रम में था। उन दिनों भी मेरा मोबाइल ऐक्टिवेट था। अगर छिपना होता तो मोबाइल क्यों ऐक्टिव रखता। मैने टीवी में देखा कि ब्लास्ट मामले में पुलिस मेरी तलाश कर रही है। मुझे हिंदू आतंकवाद का प्रतीक बनाया गया। मुझे 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया। मुझ पर समझौता ब्लास्ट का झूठा आरोप लगाया गया।

 

Source : Agency