नई दिल्ली 
महान दार्शनिक, समाजसुधारक और लेखक ईश्वरचंद विद्यासागर अपने जन्म के 119 साल बाद फिर बंगाल में एक चुनावी मुद्दा बन गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कोलकाता कॉलेज में उनकी मूर्ति तोड़े को मुद्दा बनाकर शिक्षित वामपंथी और मध्यम वर्गीय वोट बैंक तक जाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी की आंतरिक रिपोर्ट और प्रतिक्रिया से पता चलता है कि 2014 के आम चुनाव में लेफ्ट को जो 30 प्रतिशत वोट मिला था वो अब काफी हद तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को शिफ्ट हो रहा है। यह तृणमूल के प्रमुख चुनौती है। 

नाम न छापने की शर्त पर तृणमूल नेता ने बताया कि हमारी संभावनाएं अब वामपंथी वोट के बदलाव के स्तर पर हैं। हमें उम्मीद है कि 30 से अधिक सीटें मिलेंगी, लेकिन अगर वामपंथी अपने हिस्से का 10 फीसदी से अधिक खो देते हैं, तो हम 25 से भी नीचे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी के नेताओं को यह भी डर है कि कम से कम 15 सीटों पर जहां अल्पसंख्यक एकाग्रता कम है, भाजपा उन सीटों पर तृणमूल से ज्यादा मजबूत स्थिति बना ली है। अगर लेफ्ट का वोट बीजेपी को जाता है तो इससे उनकी बंगाली मध्यम वर्ग के बीच पकड़ और बढ़ेगी। 
 
तृणमूल के मुख्य प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में हमारी पार्टी अपनी स्थिति में सुधार करेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को जो हुआ उसके बाद हम भाजपा को पश्चिम बंगाल में बढ़त नहीं लेने देंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 34 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी ने 42 संसदीय क्षेत्रों में से केवल 2 सीटों पर जीत हासिल की। तृणमूल बंगाल में 2011 से सत्ता में है।

2014 के लोकसभा चुनाव में लेफ्ट का वोट शेयर 30 फीसदी था, जबकि भाजपा को 16 फीसदी वोट मिले थे। बंगाल के बारे में लोकप्रिय कथा यह है कि भाजपा हिंदू वोटों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है और उसकी निगाहें राज्य की उन नौ सीटें जिस पर ज्यादा संख्या में हिंदी भाषी आबादी वाले बीजेपी समर्थक रहते हैं। अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे वामपंथी, बीजेपी को तृणमूल की तुलना में कम दुश्मन के रूप में देखते हैं, जिसने उसे सत्ता से अलग कर दिया।

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बीजेपी को उम्मीद है कि बंगाल में राजनीति परिवर्तन का फायदा उसे होगा और इस चुनाव में उसकी संख्या में भी इजाफा होगा। हाल ही में, हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि सही सोच वाले लोग (जो) सीपीएम के हैं, कांग्रेस के हैं और यहां तक ​​कि टीएमसी के हैं... बीजेपी को वोट दे रहे हैं... एक राजनीतिक अर्थ में, आप कह सकते हैं कि सीपीएम का वोट भाजपा को हस्तांतरित किए जा रहा है। यह कहानी का एक हिस्सा है। लेकिन मेरा मानना ​​है कि सीपीएम, कांग्रेस और टीएमसी- इन तीनों दलों की सही सोच वाले लोग, वे इस समय 'मोदी' के लिए मतदान कर रहे हैं।

माकपा या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेतृत्व भी जमीनी स्थिति से अवगत है। सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के सदस्य नीलोत्पल बसु ने बुधवार को कहा कि तृणमूल और भाजपा दोनों वामपंथियों के वोट पाने के लिए प्रचार कर रहे हैं। लेकिन तृणमूल इस सिद्धांत पर क्यों रो रही है? यहां तक ​​कि ममता ने कहा कि वामपंथी वोट भाजपा के पास क्यों जा रहा है। आपको तृणमूल से पूछना चाहिए कि उनके नेता और मतदाता दोनों भाजपा में कैसे स्थानांतरित हो रहे हैं। एक अन्य सीपीआई (एम) नेता ने कहा कि बंगाल चुनाव में अत्यधिक ध्रुवीकरण हो रहा है इसकी वजह तृणमूल बनाम भाजपा है और इसलिए हमें कुछ नुकसान है।

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विद्यासागर कॉलेज में हुई बर्बरता और विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है। ज्यादातर शिक्षित बंगालियों द्वारा जिनके लिए विद्यासागर एक बंगाली आइकन हैं। बंगाली भाषा सीखने के लिए उनकी कितात 'बरनापरिच्य' अभी भी लोगों में सबसे लोकप्रिय है। यहीं वजह है कि हिंसा के बाद तृणमूल ने कोलकाता और अन्य जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि भाजपा ने जल्दी से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर तृणमूल को बर्बरता के लिए दोषी ठहराया और वामपंथियों ने तृणमूल और भाजपा दोनों को दोषी ठहराते हुए कोलकाता की सड़कों पर मार्च किया।

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