रायपुर
डीकेएस अस्पताल घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली हैं। इस मामले में गुरुवार को नया मोड़ अा गया है। एक ओर जहां राजधानी के गोलबाजार थाने में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद और पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता से पूछताछ की जा रही थी। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) रायपुर के तत्कालीन एजीएम सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। एजीएम सुनील अग्रवाल पर फर्जी दस्तावेजों से 65 करोड़ का लोन स्वीकृत करने का आरोप है। 

दरअसल, पुलिस ने डीकेएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता को पूछताछ के लिए गोलबाजार थाने बुलाया था। पुलिस ने उनसे दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उनसे 25 से 30 सवाल पूछे गए। डॉ. गुप्ता ने फिर से सारे सवालों के गोलमोल जवाब दिए और रिकॉर्ड देखकर ही कुछ बताने की बात कही। वह थाने में दूसरी बार बयान दर्ज कराने के लिए आए हैं। इससे पहले 6 मई को भी डॉ. गुप्ता से पुलिस पूछताछ कर चुकी है। 

पुलिस ने डॉ. पुनीत गुप्ता को नोटिस देकर पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। इस बार भी डॉक्टर गुप्ता ने आरटीआई से जानकारी मांगे जाने की बात कही। पुलिस ने उनसे लोन लेने के बारे में पूछा तो डॉ. गुप्ता ने उसे स्वीकार किया। हालांकि वो यह नहीं बता सके कि लोन में मिली रकम को कहां-कहां खर्च किया गया। पुलिस ने उनसे लोन बिना अनुमति लेने की बात पूछी, तो उन्होंने कमेटी से चर्चा करने के बाद लेने की बात कही। डॉ. गुप्ता दस्तावेज नहीं मिलने का हवाला देते हुए सवालों का जवाब देने से इंकार करते रहे। 

छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली से पीएनबी के तत्कालीन एजीएम को गिरफ्तार करने के बाद उनके प्राथमिक बयान दर्ज कर लिए हैं। सुनील अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉ. पुनीत गुप्ता को डीकेएस अस्पताल के लिए 65 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करने की बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराई थी। सुनील अग्रवाल की अनुशंसा के बाद ही ही पीएनबी ने लोन की रकम स्वीकृत की थी। 

लोन की रकम के चलते प्रदेश का एक मात्र सरकारी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल इन दिनों पीएनबी की बंधक प्रॉपर्टी है। बताया जा रहा है कि सुनील अग्रवाल को विस्तृत पूछताछ के लिए रायपुर लाया जा सकता है। इस मामले में फर्जी दस्तावेजों और लोन स्वीकृत करने की प्रक्रिया को लेकर जप्त सभी दस्तावेजी प्रमाणों की तस्दीक कराई जाएगी। 

वहीं दूसरी ओर डॉ. पुनीत गुप्ता ने पुलिस से खुद के खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस के रद्द करने की गुहार लगाई है। वर्तमान अधीक्षक डॉ. केके सहारे ने विभागीय जांच कराने के बाद इस मामले में 15 मार्च को गोल बाजार थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद पूछताछ के लिए पुलिस ने कई बार डॉ. गुप्ता को नोटिस जारी किया, लेकिन वह थाने में उपस्थित नहीं हुए थे। लगातार नोटिस के बाद भी डॉ. पुनीत गुप्ता के हाजिर नहीं होने पर पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। 

डॉ. पुनीत गुप्ता को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई है। वहीं पुलिस पूछताछ करने के लिए उनको नोटिस जारी कर रही थी। हालांकि डॉ. गुप्ता दो नोटिस के बाद भी थाने में हाजिर नहीं हुए। इस पर डॉ. पुनीत गुप्ता के विदेश भागने की संभावना के मद्देनजर लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। इसके पहले 30 अप्रैल को सुबह 11 बजे डॉ. गुप्ता को एसआईटी ने बयान दर्ज कराने गोल बाजार थाने बुलाया था, लेकिन दो घंटे के इंतजार के बावजूद वे नहीं आए और टीम ढाई घंटे इंतजार के बाद लौट गई। 

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