नई दिल्ली 

आज तक एक्सिस माई इंडिया के सर्वे में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है. 23 मई को आने वाले परिणाम अगर एग्जिट पोल की तरह ही रहते हैं तो यूपीए को तो मुश्किल होगी ही, एनडीए के घटक दलों के लिए भी मुश्किल हो जाएगी. क्योंकि पूरे देश में चुनाव इस आधार पर लड़े गए कि लोग मोदी के साथ हैं या मोदी के खिलाफ. मोदी और शाह की जोड़ी ने चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कई बड़े फैसले लिए जिसके लिए उनकी आलोचना भी हुई लेकिन नतीजे अगर अनुकूल होते हैं तो यह उनकी स्ट्रेटजी की जीत मानी जाएगी.

इसका कारण स्पष्ट है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिन-रात चुनाव प्रचार में जितना खुद को खपाया, देश के गली - गली, चौराहों तक पर जितनी जनसभाएं कीं, बीजेपी के लिए उनकी ये मेहनत एनडीए के घटक दलों के लिए भी संजीवनी साबित हुई. अंततः नतीजे अगर एनडीए के पक्ष में आते हैं, तो नरेंद्र मोदी-अमित शाह ही जोड़ी इस पर जरूर फक्र करेगी कि यह जीत उनकी है.
एग्जिट पोल के मुताबिक जीत के मायने देखें तो बीजेपी सशक्त पार्टी के तौर पर उभरेगी और पहले जो आशंकाएं जताई जा रही थीं कि अगर एनडीए को बहुमत न मिले तो उसे टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव, वाईएसआर कांग्रेस प्रमुख जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी से मदद लेने की जरूरत पड़ सकती है. अब ये आशंकाएं निर्मूल साबित होती दिख रही हैं. यहां तक कि बीजेपी भी अकेले के दम पर बहुमत पाती दिख रही है. ऐसे में बीजेपी पर पूरी तरह निर्भर करेगा कि वह अपने सहयोगी दलों को किस रूप में सरकार में जगह देती है. किसे किस पोर्टफोलियो में फिट करना है, गेंद बीजेपी के पाले में पूरी तरह जाती दिखेगी.  इस सूरत में मंत्री पद को लेकर पार्टियां जिस प्रकार का दबाव बनाती हैं, ऐसा दबाव बीजेपी के साथ नहीं दिखेगा. हालांकि ये सब रिजल्ट पर निर्भर करेगा क्योंकि अब तक सारी बातें एग्जिट पोल के मुताबिक कही जा रही हैं.

बीजेपी ने अपने घटक दलों की तुलना में क्या कुछ किया, इसे जानने के लिए इस आंकड़े पर गौर करें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 142 रैलियां कीं. इसमें उनके चार रोडशो भी शामिल हैं. कुल रैलियों में से 40 प्रतिशत रैलियां उन्होंने यूपी, बंगाल और ओडिशा में की. इन तीनों राज्यों में लोकसभा की कुल 143 सीटें हैं. इन तीनों राज्यों में एग्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी छप्परफाड़ सीटें पा सकती है. एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के मुताबिक यूपी में एनडीए को 62 से 68 सीटें मिल सकती हैं जबकि यहां सपा-बसपा गठबंधन का प्रभाव प्रबल बताया जा रहा था. बंगाल में भी यही हाल है जहां ममता बनर्जी ने बीजेपी को काफी चुनौती दी है लेकिन एग्जिट पोल कुछ और बयां कर रहे हैं.

एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को बंगाल में 19-23 सीटें मिल सकती हैं जबकि तृणमूल कांग्रेस को 19-22 सीटें मिलने की संभावना है. ओडिशा से और भी चौंकाने वाले आंकड़े हैं. यहां नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी पूरी तरह हारती दिख रही है. बीजेडी को मात्र 2-6 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि बीजेपी 15-19 सीटें जीत सकती है. इस हिसाब से एनडीए के घटक दल जरूर सोच में पड़ेंगे कि नरेंद्र मोदी का जलवा 2014 की तरह बरकरार है जब उन्होंने अपने बूते बीजेपी को ऐतिहासिक बहुमत तक पहुंचाया था.

बिहार और महाराष्ट्र दो राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी के साथ जेडीयू और शिवसेना का गठबंधन मजबूत है. इन दोनों राज्यों में बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को अच्छी खासी सीटें दी हैं. पिछले चुनाव की बात करें तो बिहार में 2014 में बीजेपी को 22 सीटें हासिल हुई थीं, जबकि नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू उस चुनाव में अकेले चुनाव लड़ी थी और मात्र दो सीटें हासिल कर पाई थी. इस बार बीजेपी ने अपने सहयोगी जेडीयू को पूरा स्पेस दिया और पिछली बार 2 सीटें जीतने के बावजूद उसे 17 सीटें दीं. रामविलास पासवान की पार्टी ने 6 सीटें जीती, इस बार उसे 6 सीटें दी गईं. इंडिया टुडे के सर्वे बताते हैं कि एग्जिट पोल अगर सही साबित हुए तो एनडीए यहां 36-38 सीटें जीत सकती है. बिहार में बेशक एनडीए के सभी गठबंधन दलों ने जी-जान से मेहनत की लेकिन उसे धार देने में नरेंद्र मोदी और अमित शाह आगे रहे. दोनों नेताओं ने बिहार के उन उन जगहों पर जनसभाएं की जहां से पार्टी को जीत की उम्मीद बंधी थी.

महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसा ही हाल नजर आ रहा है. बीजेपी और शिवसेना में लाख खटर-पटर के बावजूद गठबंधन हुआ और इसका खुशनुमा नतीजा सामने आता दिख रहा है. बीजेपी की अगुवाई में एनडीए को महाराष्ट्र में इस लोकसभा चुनाव में 38-42 सीटें आ सकती हैं. यह अनुमान इंडिया टुडे एक्सिस माई इंडिया की ओर से रविवार को जारी एग्जिट पोल में लगाया गया है. बीजेपी की अगुवाई में बीजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में 42 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी 23 सीटों पर कब्जा करने में कामयाबी रही थी जबकि 18 सीटें शिवसेना की झोली में गई थीं और एक सीट पर स्वाभिमान पक्ष ने जीत हासिल किया था. एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को महाराष्ट्र की 48 संसदीय सीटों में से 42 सीटों तक पर जीत मिल सकती है. वहीं, कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए की झोली में 6-10 सीटें जा सकती हैं.  

Source : Agency