नई दिल्ली 

17वीं लोकसभा के गठन के लिए 543 सीटों पर सात चरणों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं. सत्ता की कुर्सी दोबारा नरेंद्र मोदी को मिलेगी या देश को नया प्रधानमंत्री मिलेगा, इसका फैसला 23 मई को हो जाएगा. वहीं इसके पहले आज ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे पर 22 विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के साथ बैठक करेंगे. चुनाव के दौरान ऐसे कई मौके आए, जहां चुनाव आयोग के फैसले पर विपक्षी पार्टियों ने ऐतराज जताया. विपक्षी पार्टियों ने कभी बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया तो कभी चुनाव आयोग को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. आइए आपको बताते हैं वो मौके, जब विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग पर हमलावर हो गईं.

पीएम मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट

पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह द्वारा आचार संहिता तोड़ने की शिकायत पर चुनाव आयोग से क्लीन चिट मिलने पर विपक्षी पार्टियां हमला बोल चुकी हैं. कांग्रेस ने कहा था कि चुनाव आयोग नरेंद्र मोदी का पिट्ठू बन गया है. चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की चिट्ठियों से खुलासा हुआ कि मुख्य चुनाव आयुक्त और लवासा के बीच मोदी-शाह को क्लीन चिट दिए जाने पर मत अलग थे. कई अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसे मुद्दा बनाते हुए चुनाव आयोग से सख्त कदम उठाने को कहा था.


 बंगाल में प्रचार का समय घटाना

 सातवें चरण की वोटिंग से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें विद्यासागर कॉलेज में तोड़फोड़ की गई और महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति टूट गई. इसके बाद चुनाव आयोग ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पहली बार अनुच्छेद 324 का इस्तेमाल किया और बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार में 19 घंटे की कटौती कर दी. इस फैसले को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ खड़ा हो गया. ममता बनर्जी ने कहा था कि मैंने आरएसएस से भरा हुआ चुनाव आयोग कभी नहीं देखा. इसके अलावा कांग्रेस और माकपा ने कहा कि अगर हिंसा के मद्देजनर प्रचार रोकने की नौबत आ गई थी तो गुरुवार तक आयोग इंतजार क्यों कर रहा है.

लंबा चुनाव कराने पर सवाल

विपक्षी पार्टियों ने उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जाने पर भी सवाल उठाए. बीजू जनता दल, आरजेडी समेत कई पार्टियों का कहना था कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग ने इतने चरणों का कार्यक्रम बनाया है. गौरतलब है कि पिछले चुनाव में पश्चिम बंगाल में 5 चरणों में चुनाव कराए गए थे. बिहार में पिछली बार 6 चरणों में चुनाव हुए थे, जो इस बार 7 चरणों में हुए. तर्क यह भी दिया गया कि जब 4 चरणों में महाराष्ट्र की 48 सीटों और एक चरण में तमिलनाडु की 39 सीटों पर चुनाव हो सकता है तो प.बंगाल की 42 सीटों पर चुनाव सात चरण में क्यों हो रहे हैं.

भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप

विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का भी आरोप लगाया. खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यह बात कह चुके हैं. उन्होंने बयान में कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के मामलों में नरमी से पेश आता है जबकि विपक्ष के मामलों में पूरी तरह पक्षपात करता है. राहुल गांधी ने कहा कि निर्वाचन आयोग जो भी करे, जनता ने मन बना लिया है तो कोई कुछ नहीं कर सकता. लेकिन इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है.

नतीजों से पहले ईवीएम पर सवाल

सभी एग्जिट पोल में जिस तरह भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया जा रहा है. उससे विपक्षी पार्टियां हैरान हैं. हालांकि नतीजे 23 मई को आने हैं लेकिन विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग जाने की तैयारियां कर चुकी हैं. आज विपक्षी पार्टियां ईवीएम और वीवीपीएटी के मुद्दे पर चुनाव आयोग के साथ बैठक करेंगी. इस बैठक की अगुआई चंद्रबाबू नायडू करेंगे, जो पहले भी ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते रहे हैं.

राहुल गांधी ने भी इस बाबत ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, चुनावी बांड और ईवीएम से लेकर चुनाव की तारीखें तय किए जाने तक में चालाकी की गई, नमो टीवी, 'मोदी आर्मी' और अब केदारनाथ में ड्रामा, चुनाव आयोग का प्रधानमंत्री और उनकी मंडली के आगे समर्पण सभी हिंदुस्तानियों के सामने स्पष्ट है. आयोग डरा हुआ रहेगा और अब उसकी प्रतिष्ठा नहीं रहेगी." कांग्रेस पार्टी अपनी शिकायतें चुनाव आयोग के सामने रखेगी.

Source : Agency