भोपाल
लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले मध्यप्रदेश में सियासी घमासान मचा हुआ है। बीजेपी के नेता तो पहले से ही दावा करते रहे हैं कि सरकार अल्पमत में हैं और कभी भी गिर सकती है। लेकिन नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की चिट्ठी से प्रदेश की सियासत में खलबल मच गई।

गोपाल भार्गव ने राज्य के राज्यपाल को लिखा कि मध्यप्रदेश की सरकार अल्पमत में हैं। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शक्ति परीक्षण करवाया जाए। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कह दिया कि कांग्रेस के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। फिर क्या था प्रदेश की सियासी टेंपरेचर और बढ़ गया है।

बीजेपी नेताओं के दावे पर सीएम कमलनाथ खुद जवाब देने आएं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग पहले ही दिन से कोशिश कर रहे हैं। पिछले पांच महीनों में चार बार बहुमत साबित कर चुके हैं। वे लोग इसे फिर से कराना चाहते हैं, हमें कोई समस्या नहीं है। खुद को बचाने के लिए वे लोग वर्तमान सरकार परेशान करने की पूरी कोशिश करेंगे। फ्लोर टेस्ट के लिए सरकार तैयार है।

वहीं, शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री रहे कैलाश विजयवर्गीय रविवार को इंदौर में वोट डालने आए थे। जब मीडिया ने उनसे पूछा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का दावा है कि वे मध्यप्रदेश में 29 में से 22 सीटें जीतने वाले हैं। इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वे 20-22 दिन मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं यह प्रश्न चिह्न है। इस लोकसभा चुनाव के बाद ही पता चलेगा।

मध्यप्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें मिली थी। कांग्रेस को कुल 114 सीटें मिली थीं जबकि बहुमत के लिए 116 सीट चाहिए। वहीं भाजपा को 109 सीट मिली थीं। इसके अलवा 4 निर्दलीय को, बसपा को दो और सपा को एक सीट मिली थी। कमलनाथ सरकार को निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों का समर्थन मिला हुआ है। हालांकि कई बार बसपा और सपा विधायकों की नाराजगी भी सामने आयी है, जिसे बाद में कमलनाथ ने दूर भी कर दिया था।

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