शिवपुरी
लोकसभा चुनाव में गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर कांग्रेस को मिली हार देश भर में चर्चा का विषय बन गई है। इस सीट पर आज़ादी के बाद से ही सिंधिया घराने का कब्जा रहा है। पार्टी चाहें जो हो यहां की जनता ने सिंधिया घराने के ही उम्मीदवार को चुना है। लेकिन 2019 में इतिहास बदल गया। मोदी लहर में कांग्रेस और सिंधिया घराने के अभेद किले में भी बीजेपी ने सेंध लगादी। वो भी लाखों के अंतर से। इस सीट पर 2002 से 2014 तक सिंधिया घराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया 'महाराज' सांसद रहे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें उनकी हार के लिए इतिहास में जाना जाएगा। वह पहले सिंधिया घराने के शख्स हैं जिन्हें जनता ने नकार दिया। भारतीय जनता पार्टी के कृष्णपाल सिंह यादव से 1,25,549 वोटों के भारी अंतर से हार गए।

दरअसल, शिवपुरी जिला सिंधिया के गुना लोकसभा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। यहां सालों से रोजगार और पानी की बड़ी किल्लत है। इस क्षेत्र में लोग कृषि पर निर्भर रहते हैं। यहां 80 फीसदी लोग खेती किसानी पर निर्भर हैं लेकिन उनके सामने पानी एक बड़ी समस्या है। एक समय था जब सिंधिया घराने इस क्षेत्र में अपनी छुट्टी मनाने आता था। तब यहां तालाब, झरने हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ पानी की किल्लत बढ़ती गई। जिसे दूर करने में सिंधिया नाकाम रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि, ऐसा नहीं कि महाराज ने यहां जनता के लिए काम नहीं किया लेकिन जो काम शुरू किए गए वह या तो पूरे नहीं हुए या फिर उन पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि महाराज सीवर का प्रोजेक्ट लाए थे और फिर उसके चलते पूरे शहर की सड़कें खोद दी। सड़कें ख़ुद तो गयीं लेकिन वापस कभी नहीं भरी गयीं. सीवर अभी तक नहीं लगा। इसलिए शायद लोगों ने इस बार उन्हें वोट नहीं दिया।

सिंधिया के करीबियों का कहना है कि वह अपने पिता से काफी अलग हैं। माधावराव सिंधिया लोगों से मिलते थे उनकी हर छोटी छोटी समस्या को दूर करने के लिए काम करते थे। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसे नहीं है। उनसे जब कोई छोटी समस्या को लेकर मिलने जाता है तो उसे पहले तो महल में कई घंटों इंतेजार करना होता है। जिसके बाद सिंधिया उनसे मिलते हैं फिर काम का आश्वासन दे देते हैं। लेकिन ह काम असल में पूरे नहीं हो पाते। जिससे लोगों में यह संदेश जाता है कि महाराज उनका काम नहीं करवा रहे हैं। इस बार यही कारण रहा है कि सिंधिया के खिलाफ यहां के लोगों ने वोट किया है। रोजगार के अलावा यहां की खुदी सड़कें भी बड़े मुद्दा रही हैं। मोदी सरकार के दौरान सिंधिया के क्षेत्र में बहुत अधिक काम नहीं हो पाया। जिसे लेकर जनता में काफी नाराजगी रही। जो नतीजों में सबके सामने आई। 

गुना-शिवपुरी लोकसभा में कांग्रेस को कर्जमाफी का भी बहुत अधिक लाभ नहीं मिल सका है। कांग्रेस ने विधानसभा चुानव में यह वादा किया था कि वह किसानों का कर्ज माफी करेगी। लेकिन इसका लाभ सिंधिया के क्षेत्र में किसानों को नहीं मिला। जिसका परिणानसरूप ग्रामीण क्षेत्रो में नुकसान हुआ है। सिंधिया का बड़ा वोट बैंक ग्रामीण क्षेत्र में रहा है। जिसकी यह वजह भी सामने आई है कि गुना संसदीय क्षेत्र में तीन जिले शिवपुरी, गुना और अशोकनगर की आठ सीटें आती हैं। जहां ज्यादा वोट बैंक ग्रामीण क्षेत्र से आता है। कर्जमाफी का सिंधिया को बड़ा नुकसान हुआ। वे चुनाव संभा में मंच ये कर्जमाफी का ऐलान करते, उसी सभा में किसान उनसे सवाल करते कि उनका कर्जमाफ  नहीं हुआ। 

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