भोपाल
निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की कुर्सी करीब ढाई महीने अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई है। शासन ने उज्जैन विवि के प्रोफेसर मोरध्वज परिहार को छह माह के लिए अध्यक्ष नियुक्त किया है। ढाई महीने पहले तत्कालीन अध्यक्ष अखिलेश कुमार पांडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी दौरान आचार सहिंता के चलते अध्यक्ष की नियुक्ति अटकी हुई थी। 

उज्जैन विवि प्रो. परिहार को विवि आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। उनका कार्यकाल छह माह का होगा। नवनियुक्त अध्यक्ष परिहार कल आयोग पहुंचकर अपना पदभार ग्रहण करेंगे। आयोग अध्यक्ष अखिलेश कुमार पांडे ने एक मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे राजभवन ने आठ मार्च को स्वीकृत किया। चार मईअप्रैल को शासन ने उनको कार्यमुक्त कर दिया। अध्यक्ष पांडे को मुक्त करने और अध्यक्ष के पद पर अपना व्यक्ति बैठाने के लिए शासन ने नया नोटीफिकेशन जारी किया। इसमें एक साल तक के लिए वे प्रभारी के तौर पर अपना अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं। शासन ने अध्यक्ष के तौर पर प्रो. परिहार की नियुक्ति करने के लिए आयोग फाइल भेजी थी, लेकिन आयोग ने शासन की फाइल को नामंजूर कर दिया। उन्होंने शासन को आचार संहिता खत्म होने तक इंतजार करने के लिए कहा था। आचार संहिता 27 मई को उतर गई है। इसके बाद शासन प्रभारी अध्यक्ष के तौर पर प्रो. परिहार को नियुक्त कर दिया है। 

अध्यक्ष के अभाव में रुके सारे कार्य 
अध्यध्य पांडे को चार अप्रैल को कार्यमुक्त कर दिया है, लेकिन उन्होंने एक मार्च से ही फाइलों पर अपना अनुमोदन देना बंद कर दिया था। अब ढाई महीने तक आयोग में फाइलों का ढ़ेर बढ़ता रहा है। जबकि आगामी सत्र में प्रवेश देने के लिए निजी विवि के पक्ष में कई निर्णय होना शेष है। अब नये अध्यक्ष आने के बाद ही फाइलों पर अनुमोदन होगा। 

ऐसे होगा एक साल का कार्यकाल 
अध्यक्ष की नियुक्ति करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है। राज्यपाल के अधिकार पर शासन ने अतिक्रमण करने के लिए प्रभारी अध्यक्ष को नियुक्ति करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें वे छह माह के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति कर सकते हैं। इसके बाद वह छह माह के लिए और कार्यकाल बढ़ा सकता है। इसी दौरान राज्यपाल को नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति करने के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन बुला सकता है। 

Source : Agency