जयपुर
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच लंबे समय से वर्चस्व को लेकर लड़ाई की सुगबुगाहट जारी है। इसके संकेत इस बात से मिलते हैं कि अशोक गहलोत जहां दिल्ली में अहमद पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, वहीं पायलट पार्टी काडर के बीच अपनी जमीन और मजबूत करने में लगे हुए हैं। पायलट रविवार को जालोर जिले में पहुंचे और पूरी रात एक किसान के घर में गुजारी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद दोनों के बीच की लड़ाई खुलकर सामने आ गई।


पूर्व में अशोक गहलोत ने अपने बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर लोकसभा सीट पर हार का जिम्मेदार सार्वजनिक तौर पर पायलट को ठहराया था। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में गहलोत ने कहा था कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को जोधपुर मे वैभव की हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। खास बात यह है कि राजस्थान की जोधपुर सीट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का घरेलू मैदान माना जाता है। वह खुद इस निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार चुने गए हैं।


बवाल शुरू हुआ तो दी सफाई
पायलट पर गहलोत की टिप्पणी के बाद जब बवाल शुरू हुआ तो मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। राज्य कांग्रेस के कई नेता इस लड़ाई में खुलकर सामने आए और उन्होंने गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग भी की। कांग्रेस विधायक पृथ्वीराज मीणा ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की सिफारिश की।

हार की जिम्मेदारी तय करने की मांग
पृथ्वीराज से पहले राज्य के दो मंत्रियों- रमेश मीणा और उदय लाल अंजाना ने कहा कि राजस्थान में हार के पीछे जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट जीत पाने में असफल रही जबकि पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की थी।

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