भोपाल
मध्य प्रदेश में विकासकार्यों को पूरा करने के लिए सरकार लगातार कर्ज लेने पर मजबूर हो रही है। किसान कर्ज माफी से लेकर तमाम खर्चों को पूरा करने के लिए जून में ही सरकार को अब दूसरी बार कर्ज लेना पड़ रहा है। इसके लिए सरकार बाजा़र का दरवाज़ा खटखटाएगी।

दरअसल इस माह निर्माण कार्य से जुड़े विभागों को राशि आवंटित करना है। यह इसलिये कि कई जरुरी निर्माण कार्य बारिश से पहले कराने का दबाव लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर अधिक है। इसी कारण इन विभागों से से राशि की मांग लगातार आ रही है। लोक निर्माण विभाग में तो कई ठेकेदारों ने अघोषित रूप से काम बंद कर दिया है। वे काम जो पहले ही करा दिये गये हैं, लेकिन अब तक भुगतान नहीं होने से करोड़ों के भुगतान अटके हैं। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग में ही 150 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान अटके पड़े हैं। भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों ने नये निर्माण कार्यों को रफ्तार नहीं दे पा रहे हैं। वहीं कुछ मामलों में तो काम ही रोक दिया गया है। ऐसे हालात में सरकार पर दबाव है कि वह बारिश से पहले वे जरुरी काम को पूरा करायें, जिससे कि आने वाले समय में किसी तरह की परेशानी नहीं हो। इधर कर्मचारियों को 3 फीसदी डीए का आदेश जारी होने के बाद एक बार फिर सरकार के खजाने पर दबाव बढ़ गया है। 

प्रदेश के सभी अधिकारियों- कर्मचारियों को डीए देने पर एक वर्ष की अवधि में सरकार के खजाने पर 1647 करोड़ रुपये का वित्तीय भार और बढ़ गया है। इसी के चलते राज्य सरकार जनवरी से अप्रैल 2019 तक कुल 4 माह की अवधि का डीए कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में जमा कर रही है, जिससे कि सरकार के खजाने पर नगदी की बोझ नहीं आएगा। हांलाकि इस मद में राज्य सरकार को 550 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। लेकिन मई से नगद लाभ दिये जाने के कारण अब जो वेतन अधिकारियों- कर्मचारियों को जुलाई में मिलेगा, उसमें दो माह का ऐरियर कर्मचारियों को नगद देना पड़ेगा। इससे राज्य सरकार के खजाने पर 275 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यह वेतन मद में होने वाले खर्च के अतिरिक्त राशि होगी, जिसका इंतजाम सरकार को करना है। इसके अलावा आपदा राहत कोष के लिये भी पर्याप्त राशि का इंतजाम करना है। बारिश के दौरान किसी जिले में बाढ़ के हालात बने या फिर फसलों को हानि हुई तो उसके लिये भी राशि का प्रावधान करके रखना है। हांलाकि राज्य सरकार के राहत मद में 400 करोड़ रुपये का मद रखा गया है, लेकिन यह राशि भी फिलहाल कम है। इधर राज्य सरकार पर कर्जमाफी का दबाव भी बना हुआ है। दूसरे चरण में 50 हजार से लेकर एक लाख तक कर्ज वाले किसानों के कर्ज माफ किये जाने हैं। इसके लिये सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम करना है। इतनी बड़ी राशि का इंतजाम तो केवल बजट में ही हो सकेगा, लेकिन फिलहाल नगद रूप में भी दो हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि की व्यवस्था करना है, जिससे कि यह काम शुरू हो सके। किसानों की कर्ज माफी, निर्माण कार्यों का भुगतान और डीए सहित अन्य जरुरी खर्च के चलते इस माह राज्य सरकार के खजाने पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में अब सरकार के पास नगदी की समस्या से निजात पाने के लिये कर्ज लेने का ही विकल्प बचा है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इसी माह राज्य सरकार ने 1000 करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से लिया है। यह कर्ज 7 जून को लिया गया है। इस तरह अभी कर्ज लिये हुए एक पखवाड़ा भी नहीं बीता है और फिर कर्ज लेने की नौबत आ रही है। पिछले माह भ्ी राज्य सरकार ने 1500 करोड़ रुपये का कर्ज दो बार में लिया था। वित्तीय वर्ष 2019-20 की अवधि में वित्तीय वर्ष की शुरूआत यानि अप्रैल से ही कर्ज लेने का सिलसिला शुरू हो गया है। अप्रैल में भी 500 करोड़ रुपये कर्ज लिया गया था। इस तरह ढाई माह की अवधि में राज्य सरकार अब तक 3000 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। वित्त विभाग के मुताबिक फिलहाल 31 मार्च 2019 की अवधि में राज्य सरकार पर एक लाख 82 हजार 920 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है।

Source : Agency