नई दिल्ली।
 इस साल चंद्र ग्रहण आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन यानी 16-17 जुलाई की दरमियानी रात में चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। यह लगातार दूसरा साल है जब आषाढ़ी पूर्णिमा पर भारत में चंद्र ग्रहण हो रहा है। वर्ष 2018 में भी आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन 27-28 जुलाई की मध्यरात्रि में खग्रास चंद्र ग्रहण हुआ था। इस साल करीब तीन घंटे तक आकाश में इस अद्भुत खगोलीय घटना का नजारा देखा जा सकेगा। 16-17 जुलाई की दरमियानी रात 1.32 बजे ग्रहण का स्पर्श होगा। रात्रि 3.01 बजे ग्रहण का मध्य रहेगा। रात्रि 4.30 बजे ग्रहण का मोक्ष होगा। चंद्र ग्रहण का कुल समय 2 घंटे 58 मिनट का रहेगा।

16 जुलाई को खंडग्रास चंद्र ग्रहण का योग
इस बार आषाढ़ी पूर्णिमा 16 जुलाई को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, वैधृति योग, विशिष्ट करण तथा धनु राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। ग्रह गोचर की दृष्टि से देखें तो इस दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा धनु व मकर राशि में चंद्र ग्रहण होने से अतिवृष्टि के साथ कहीं-कहीं प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति निर्मित होगी। ग्रहों की दृष्टि से देखें तो यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में चंद्र-केतु-शनि की त्रिग्रही युति के साथ हो रहा है। यही नहीं इसका समसप्तक दृष्टि संबंध मिथुन राशि स्थित सूर्य, राहु व शुक्र की त्रिग्रही युति से बन रहा है। ग्रह युतियों में देखें तो दोनों युतियों में चार ग्रह राहु-केतु से पीड़ित हैं। इसका असर प्राकृतिक, सामाजिक व राजनीतिक प्रभावों को दर्शाएगा।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव शासन की कार्यप्रणाली में परिवर्तन के रूप में दिखाई देगा। अधिकारियों में कार्य का परिवर्तन होगा। सरकार में परिवर्तन होगा।
चंद्र ग्रहण की युति का मंगल बुध से षड़ाष्टक योग बनेगा। मैदिनी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस प्रकार की ग्रह स्थिति जलवायु परिवर्तन के लिए खास है।
चंद्रमा की राशि कर्क में मंगल तथा बुध का गोचर वर्षा ऋ तु के चक्र को प्रभावित करेगा।
धनु राशि में ग्रहण होने के कारण इस राशि वाले विशेष रूप से प्रभावित होंगे।

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