कई बार हमें मेहनत करने के बाद भी उसका पूरा फल नहीं मिल पाता है। इस कारण हम परेशान रहते हैं और जीवन की किसी भी खुशी को पूरी तरह इंजॉय नहीं कर पाते हैं। हम इस बात से परेशान होते हैं कि आखिर यह क्या वजह है कि हम पूरे और सही दिशा में किए गए प्रयासों के बाद भी चूक रहे हैं? दरअसल, इसका कारण घर का वास्तु दोष हो सकता है। इस बारे में हम समय-समय पर आपको वास्तुशास्त्री कुलदीप सलूजा द्वारा लिखित पुस्तक संपूर्ण सायंटिफिक वास्तु से वास्तु टिप्स देते रहते हैं। ताकि आपकी जीव खुशहाल रहे। आज जानिए आउट हाउस के वास्तु के बारे में…

बड़े भूखंड में कंपाउंड वॉल और भवन के बीच की जगह में जो गैराज या सर्वेंट रूम बनाए जाते हैं, उन्हें आउट हाउस कहते हैं। अपने घर में आउट हाउस बनाते समय दिशाओं का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

अगर आपका घर पूर्व या उत्तर मुखी है तो ऐसे प्लाट में आउट हाउस प्लॉट के अग्नेय कोण या वायव्य कोण में बनाए जाने चाहिए।

आउट हाउस बनवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि मुख्य भवन और आउट हाउस के बीच दूरी कम है तो आउट हाउस का फ्लोर मुख्य भवन के फ्लोर से नीचा होना चाहिए।

आउट हाउस का निर्माण अगर आप अग्नेय कोण में करवा रहे हैं तो इसका दरवाजा ईशान कोण की उत्तर दिशा में रखें और यदि वायव्य कोण में इसका निर्माण करा रहे हों तो इसका दरवाजा ईशान कोण की पूर्व दिशा में होना चाहिए।

आउट हाउस बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अगर आपका घर दक्षिण मुखी या पश्चिम मुखी है तो आउट हाउस का निर्माण नैऋत्य कोण में कराना उचित रहता है। लेकिन ऐसा करते समय ध्यान रखें कि यह कंपाउंड वॉल से एकदम सटा हुआ रहे। साथ ही मुख्य भवन से इसकी दूरी कम से कम 4 फीट जरूर हो।

नैऋत्य कोण में आउट हाउस बनवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसके फ्लोर का लेवल मुख्य भवन के फ्लोर के लेवल के बराबर हो। साथ ही इसका मुख्य द्वार भी ईशान कोण की पूर्व दिशा या ईशान कोण की उत्तर दिशा में ही रखें।

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