सीहोर
मध्य प्रदेश के राजस्व और परिवहन मंत्री गोविन सिंह राजपूत का सीहोर में एक्शन मोड पर आना विवाद में पड़ गया है. राजस्व अधिकारी संघ ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संघ का कहना है, तहसील ऑफिस न्यायालय का हिस्सा होता है. मंत्री का ये व्यवहार अदालत का अपमान है.

अचानक पहुंचे मंत्री- राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मंगलवार को अचानक सीहोर तहसील कार्यालय का जायज़ा लेने पहुंचे थे. वो तहसीलदार के डायस पर बैठ गए और राजस्व कार्यो की फाइल देखीं. काम और निराकरण की फ़ाइल देखीं.उनका स्पॉट पर मूल्यांकन किया. काम में ज़बरदस्त लापरवाही देखकर उन्होंने वहीं तहसीलदार विनोद कुशवाह को निलंबित कर दिया.

नहीं था रिकॉर्ड- दरअसल इस तहसील दफ्तर में काम ना होने और केस पेंडिंग होने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इसलिए मंत्री गोविंद राजपूत अचानक निरीक्षण पर पहुंचे थे. उन्होंने जब तहसीलदार से सीमांकन,अतिक्रमण, नामांतरण,आर टी आई का रिकॉर्ड और शिकायत का रजिस्टर मांगा तो पता चला कि इस ऑफिस में आज तक ऐसा कोई रजिस्टर बनाया ही नहीं गया. इस पर मंत्री नाराज हो गए. उन्होंने शिकायतों का अंबार देखकर जनता के सामने वहीं तहसीलदार सुधीर कुशवाह को सस्पेंड कर दिया.सीहोर तहसील कार्यालय में सीमांकन के 191, नामांतरण के 595, आरटीआई का रिकॉर्ड और वसूली की आर आर सी मेंटेन नहीं मिली.


गुस्सा हुए अधिकारी-कर्मचारी- राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के एक्शन पर राजस्व अधिकारी संघ भड़क गया है. संघ ने हड़ताल की चेतावनी दी है.राजस्व अधिकारी संघ ने निलंबन की कार्रवाई को एक तरफा बताया है.संघ का ये भी कहना है कि गोविंद सिंह राजपूत डायस पर पहुंच कुर्सी पर बैठे थे.तहसील ऑफिस न्यायालय व्यवस्था का हिस्सा होता है. मंत्री के आचरण से न्यायालय के काम में बाधा पहुंची.

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