नई दिल्ली
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के विपरीत इस बार राज्यसभा में बिलों को पास कराने में रुकावटें आनी की संभावना लगभग खत्म हो गई है। इसके संकेत सोमवार को उस समय मिले जब तृणमूल कांग्रेस ने भी राज्यसभा में दो अहम प्रस्तावों का समर्थन करने की घोषणा कर दी। दरअसल, TMC का यह कदम चौंकाने वाला क्योंकि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की ममता सरकार और केंद्र के बीच टकराव देखा गया था। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी, बीजेडी, आरजेडी ने भी जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।
आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू एवं कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का एक प्रस्ताव तथा ‘जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004’ संशोधन विधेयक सोमवार को राज्यसभा में पेश किया। इससे पहले शुक्रवार को दोनों प्रस्ताव लोकसभा में पारित हो चुके हैं।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस सप्ताह के अंत में चार और सदस्यों को शामिल कर राज्यसभा में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। ऐसा होता है तो NDA के पास 115 सांसद हो जाएंगे। ये सदस्य बिहार, गुजरात और ओडिशा से हैं। बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी को जगह मिलेगी। गुजरात में बीजेपी के खाते में दो और ओडिशा में एक सीट जुड़ जाएगी। इससे पहले तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के चार और भारतीय राष्ट्रीय लोकदल के एक सदस्य बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

गौरतलब है कि 235 सदस्यों वाले उच्च सदन में बीजेपी 75 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस 48 सदस्यों वाली सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस 13-13 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी गैर-कांग्रेस-गैर बीजेपी पार्टी हैं। 24 जुलाई को तमिलनाडु से पांच सीटें खाली होंगी। ये सीपीआई के डी राजा और अन्नाद्रमुक के केआर अर्जुनन, डॉ. आर. लक्ष्मणन, डॉ. वी. मैत्रेयन और टी. रथिनवेल हैं।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राज्यसभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि विधेयकों को मंजूरी देने में बाधा डालकर लोगों के जनादेश को नहीं दबाया जाना चाहिए। पहले से उम्मीद जताई जा रही थी कि बीजेपी को बीजू जनता दल (5), वाईएसआर कांग्रेस (2) और टीआरएस (6 सदस्य) जैसे दलों से मुद्दा-आधारित समर्थन मिल सकता है।

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