साढेसाती शनि की एक चाल है जिसे आमतौर पर अशुभ माना जाता है क्योंकि इस दौरान शनि व्यक्ति की जन्मराशि से अगली और पिछली राशि में संचार करते हुए शुभ और प्रतिकूल फल प्रदान करता है। शनि का यह गोचर हमेशा और हर किसी के लिए अशुभ नहीं होता है। कुछ लोगों के लिए शनि की साढेसाती बहुत ही शुभ फलदायी होती है। ऐसे लोग साढेसाती के दौरान सफलता की ऊंचाइयों को छूते हैं। आइए देखें साढेसाती के दौरान शनि किन्हें देते हैं शुभ लाभ।


साढेसाती के दौरान अगर किसी व्यक्ति की शुभ ग्रह की दशा या महादशा चल रही होती है तो शनि महाराज अधिक परेशान नहीं कर पाते हैं। शनि बहुत से बहुत परिश्रम अधिक करवाएंगे लेकिन लाभ भी दिलाएंगे। किसी काम का शुभ परिणाम मिलने में अधिक समय लग सकता है।

तुला राशि में शनि उच्च के होते हैं जबकि मकर और कुंभ इनकी खुद की राशि है। इन तीन राशि वालों पर भी शनि की अशुभ दृष्टि का प्रभाव कम होता है। अपनी दशा और गोचर में शनि महाराज इन्हें लाभ भी देते हैं।


जन्मकुंडली में चंद्रमा कर्क राशि में हो और शनि का बल कम हो तो साढेसाती दौरान व्यक्ति को शनि परेशान नहीं करते हैं। बलवान चंद्रमा की दशा चल रही हो तो शनि की साढेसाती के दौरान व्यक्ति को नुकसान की बजाय लाभ और उन्नति मिलती है।

शनि अगर कुंडली में तीसरे, छठे, आठवें और 12 वें घर में उच्च के हों तो यह शुभ फल देते हैं। यानी शनि तुला राशि में इन घरों में होने पर व्यक्ति को साढेसाती के दौरान भी कष्ट नहीं होने देते हैं। अगर इन्हें परेशानियों से गुजरना भी होता है तो अंत उसका शुभ ही होता है।

 

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