इंदौर
इंदौर शहर की जीवन दायिनी कान्ह और सरस्वती नदियों को पुनर्जीवित करने और प्रदूषण मुक्त करने के लिए 350 किमी सीवर लाइन डालने का काम किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त आशीष सिंह ने इसके लिए तय मापदंडों पर समय सीमा में काम कराने के लिए खुद प्रतिदिन मानीटरिंग की जिम्मेदारी संभाल रखी है। केंद्र और राज्य सरकार की मदद से इस काम में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए नदी के चौड़ीकरण और गहरीकरण का काम करने के साथ इसमें मिलने वाले 43 नालों का पाइप लाइन के जरिये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने का काम किया जाएगा।

निगमायुक्त आशीष सिंह के अनुसार 12 आउटफाल का पानी कान्ह नदी में मिलने से रोका जा चुका है 31 दिसम्बर तक यह काम पूरा करने का टारगेट अफसरों को दिया गया है। इंदौर संभागायुक्त ने इन दोनों ही नदियों के शुद्धिकरण के काम में तेजी लाने के लिए पिछले दिनों संबंधित विभागों के अफसरों की बैठक भी ली थी। इसमें कहा गया था कि अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि जो समय सीमा तय की गई है, उसमें किसी तरह की कोताही नहीं होना चाहिए। इसे निगमायुक्त ने प्राथमिकता में रखा है।

गंदा नाला बन चुकी इंदौर की दो नदियों के पुनर्जीवन के लिए प्रशासन ने काम शुरू किया है। इन नदियों के उद्गम स्थल से 2 से 5 किमी की दूरी पर 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे हैं। ये प्लांट हुकमाखेड़ी, नहर भंडारा, प्रतीक सेतु, राधा स्वामी सत्संग, आजाद नगर और स्मार्ट सिटी सीपी शेखर नगर में तैयार हो रहे हैं। यहां कुल 77 एमएलडी के प्लांट का काम हो रहा है।

दोनों ही नदियों पर कुल 433 आउट फाल को जोड़ने का काम दिसम्बर 19 तक पूरा किया जाना है। मुख्य नाले में कुल 1313 आउट फाल और नदी नालों के मिलाकर 1746 आउटफाल को भी इसी अवधि में टेपिंग करने का काम किया जाएगा। इसके बाद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल नदियों में छोड़े जाने पर नदियों में 12 महीने पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके लिए 11 स्थानों पर स्टाप डेम बनाकर पानी एकत्र किया जाना है। यहां सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।

Source : Agency