इंदौर 

मशहूर फिल्म अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना अब राष्ट्र विरोधी हो गया है. असल में, आधी आबादी के हित में उल्लेखनीय योगदान के लिए आजमी को इंदौर के आनंदमोहन माथुर चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से 'कुंती माथुर सम्मान' से नवाजा गया. इसके बाद उन्होंने समारोह को संबोधित किया.

कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मौजूद रहे. दिग्विजय सिंह ने भी हल्लाबोला और लिंचिंग पर सरकार और आएएसएस को घेरा. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मॉब लिंचिंग के पीछे दो वजहें हैं. पहला लोग नाराज हैं क्योंकि उन्हें समय से न्याय नहीं मिल रहा है. दूसरा, बीजेपी और आरएसएस लोगों की मानसिकता को प्रभावित कर रहे हैं. आपने देखा ही जब आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि 'हमें आवेदन, निवेदन और फिर दना-दन सिखाया गया है. यह उसी मानसिकता का परिणाम है.
 
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शबाना आजमी ने कहा कि माहौल कुछ इस तरह का बनाया जा रहा है कि सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को तत्काल राष्ट्रविरोधी कह दिया जाता है. उन्होंने देश की कमियों को दूर करने के लिए इन्हें सामने लाए जाने की जरूरत पर जोर दिया. शबाना ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा, 'हमारे मुल्क की अच्छाई के लिए जरूरी है कि हम इसकी बुराइयां भी बताएं. अगर हम बुराइयां बताएंगे ही नहीं, तो हालात में सुधार कैसे लाएंगे? लेकिन वातावरण इस तरह का बन रहा है कि अगर आपने खासकर सरकार की आलोचना की तो आपको फौरन राष्ट्रविरोधी कह दिया जाता है. हमें इससे डरना नहीं चाहिए और इनके सर्टिफिकेट की किसी को जरूरत भी नहीं है.'

 
शबाना ने कहा, 'हम गंगा-जमुनी तहजीब में पले-बढ़े हैं. हमें मौजूदा हालात के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए.' आजमी ने सांप्रदायिकता का विरोध करते हुए कहा, 'हिंदुस्तान एक खूबसूरत मुल्क है. लोगों को बांटने की कोशिश इस मुल्क के लिए सही नहीं हो सकती.' अभिनेत्री ने यह भी कहा कि सांप्रदायिक दंगों से सबसे ज्यादा तकलीफ महिलाओं को होती है. उन्होंने कहा, 'दंगों से एक महिला का घर बर्बाद होता है, उसके बच्चे बेघर होते हैं और वे स्कूल नहीं जा पाते. सांप्रदायिकता की सबसे बड़ी शिकार महिला ही बनती है.'

शबाना आजमी की टिप्पणी पर बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि हर आदमी को बीजेपी को नापंसद करने, अपनी राय जाहिर करने, सत्ता के खिलाफ बोलने का अधिकार है. लेकिन इस तरह का बयान बेबुनियाद है. मेरा मानना है कि यह भारत की सबसे सहिष्णु सरकार है.

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