लंदन
क्रिकेट में टीमें जब मैदान पर उतरती हैं तो कागजी बातें पीछे रह जाती हैं और प्रदर्शन ही मायने रखता है। लेकिन, इस वर्ल्ड कप में अब तक यह विडंबना रही है कि टॉस जीतने वाली टीम अकसर मैच के अंत में बॉस साबित हुई है। मंगलवार को टीम इंडिया न्यू जीलैंड के साथ सेमीफाइनल खेलने वाली है। अब तक के रेकॉर्ड को देखते हुए यहां भी टॉस ही बॉस साबित हो सकता है। हालांकि भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करने में भी मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन इस वर्ल्ड कप में चेज करना अच्छा विकल्प नहीं रहा है।
 


ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि टॉस किसके पाले में जाता है। इस वर्ल्ड कप में अब तक का यह पैटर्न रहा है कि पिछले 20 मैचों में से 16 उन टीमों ने जीते, जिन्होंने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की। सिर्फ 4 मैचों में ही बाद में बैटिंग करने वाली टीम को जीत मिली। इनमें से एक मैच भारत का भी है, जो उसने श्रीलंका के खिलाफ जीता, जिसमें बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं था।

ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर दबाव काफी अधिक होगा और हर किसी की नजर टॉस पर होगी, जहां दूसरा मौका नहीं मिलता। यह टॉस इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि मैच में बारिश की आशंका है। टॉस जीतने वाली टीम पहले बैटिंग कर ऊंचा स्कोर खड़ा करना चाहेगी। हालांकि टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का कहना है कि वह इसे लेकर चिंतित नहीं हैं।

इस बारे में पूछने पर कोहली बोले, 'हम टॉस को लेकर चिंतित नहीं हैं। यह हमारे नियंत्रण की चीज नहीं है। आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि टॉस में क्या होने वाला है।' दूसरी तरफ न्यू जीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन साफ तौर पर मानते हैं कि पहले बैंटिंग करना फायदेमंद है। वह कहते हैं, 'हमने देखा है कि पहली पारी के मुकाबले दूसरी पारी में चीजें बदली हैं। इसे ध्यान में रखना होगा।'

कोहली ने चेज करते हुए ही जड़े हैं ज्यादातर शतक
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि विश्व कप के बड़े मुकाबले में यदि किसी टीम को बड़ा स्कोर चेज करना हो तो मुश्किल होती है। लेकिन, टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने अपने करियर में 41 शतक जमाए हैं और उनमें से ज्यादातर चेज करते हुए ही बने हैं। खुद कप्तान और उनकी टीम यह अच्छी तरह से जानते हैं कि दबाव से किस तरह से निपटना है।

हम वह टीम जो हर परिस्थिति से निपट ले: कैप्टन कोहली
कैप्टन कोहली कहते हैं, 'हम दोनों तरह से तैयार हैं। यदि टॉस कोई फैक्टर है तो हम यह नहीं कह सकते कि यदि हम टॉस हार गए तो मैच भी हार जाएंगे। हम खुद पर यकीन रखते हैं कि हम ऐसी टीम हैं, जो किसी भी परिस्थिति में मैच को निकाल सके। इसी रवैये से हम तैयार भी हैं। यह सब आंकड़े हैं और यह मानसिक दबाव तो बनाते हैं, लेकिन पिच पर इनका कोई असर नहीं होता।'

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