इस्लामाबाद 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्राध्यक्ष हों, लेकिन आर्मी के नियंत्रण से वे अबतक बाहर नहीं आ सके हैं. पाकिस्तान के फैसलों में आर्मी का दखल साफ देखा जा सकता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका की पहली यात्रा पर जा रहे हैं. इस यात्रा में पाकिस्तान आर्मी के टॉप ऑफिसर भी उनके साथ रहेंगे. पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि पाकिस्तान में सत्ता के केंद्र रहे आर्मी के सीनियर आफिसर्स प्रधानमंत्री के साथ अमेरिका जाएंगे.

पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने इमरान खान को लगभग 11 महीने हो गए हैं. इमरान 21 जुलाई को अमेरिका की पहली यात्रा पर जा रहे हैं. तीन दिनों की इस यात्रा में इमरान खान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. बता दें कि कभी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बेहद अच्छे रिश्ते रहा करते थे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते गर्त में चले गए. अब बतौर प्रधानमंत्री लगभग एक साल गुजारने के बाद इमरान खान अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं.

माना जा रहा है कि अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान इमरान उनके सामने पाकिस्तान का पक्ष रखने की कोशिश करेंगे. इस हाई प्रोफाइल यात्रा की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान ने अब तक पूरी यात्रा के शेड्यूल को सार्वजनिक नहीं किया है.

माना जा रहा है इमरान खान के साथ विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, वित्तीय सलाहकार, व्यापार और निवेश सलाहकार और दूसरे कैबिनेट मेंबर शामिल रहेंगे.

पाकिस्तान के सरकारी सूत्रों के मुताबिक अमेरिका अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी के लिए बेचैन है. लेकिन इससे पहले अमेरिका पाकिस्तान से अफगानिस्तान की सुरक्षा की गारंटी चाहता है. एक सरकारी सूत्र ने कहा, "अमेरिका जानता है कि बिना पाकिस्तान के सहयोग के अमेरिका अफगानिस्तान से अपने सैन्य बलों की वापसी नहीं कर सकता है"

पाकिस्तान और पाकिस्तान की सेना अफगान तालिबान और अमेरिकी प्रशासन के बीच सामंजस्य स्थापित करने में अहम रोल अदा कर रहा है. इसलिए माना जा रहा है कि इमरान खान के साथ सैन्य अधिकारियों का बड़ा कुनबा अमेरिका जा रहा है.

पाकिस्तान अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की कीमत अमेरिका से वसूलना चाहता है. इसलिए वह अफगान तालिबान को बातचीत की टेबल पर लाने और शांति प्रक्रिया में शामिल कराने की पूरी कोशिश कर रहा है.

बता दें ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर कई तरह के बैन लगा चुका है. अमेरिका ने पाकिस्तान आतंकवाद से लड़ने मिलने के लिए अमेरिकी मदद पर रोक लगा दी है. इमरान खान का उद्देश्य है कि ट्रंप पाकिस्तान के लिए एक बार फिर से पाकिस्तान के लिए आर्थिक मदद का रास्ता खोलें.

Source : Agency