डब्ल्यूएचओ भारत को पोलियो फ्री घोषित कर चुका है। हालांकि आपका बच्चा इस वायरस से मुक्त बना रहे इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे अहम बात जो सभी का जानना बेहद जरूरी है वह यह है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, इसे सिर्फ होने से रोका जा सकता है।

किन्हें बनाता है शिकार
पोलियो का वायरस किसी भी उम्र में व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है। हालांकि इसका सबसे ज्यादा खतरा पांच साल तक के बच्चों को होता है। यह बेहद संक्रामक रोग माना जाता है।

डब्ल्यूएचओ अमेरिका, यूरोप, वेस्टर्न पैसिफिक एरिया और साउथ ईस्ट एशिया को पोलियो मुक्त घोषित कर चुका है। वहीं अफगानिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया में इस बीमारी का प्रकोप अभी भी जारी है।

पोलियो से बचाव का तरीका
अगर आपको अपने बच्चे को पोलियो से बचाना है तो उसे पोलियो की बूंद या फिर वैक्सिनेशन जरूर लगवाएं। लगभग हर अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध होती है। वहीं सरकार के द्वारा भी समय-समय पर पोलियो ड्रॉप पिलाने की मुहीम चलाई जाती है जिसमें कर्मचारी घर-घर तक जाते हैं और बच्चों को पोलियो की बूंद पिलाते हैं।

पोलियो के वैक्सिनेशन या ड्रॉप के यूं तो कोई साइडइफेक्ट्स नहीं हैं, लेकिन कुछ मामलों में सांस लेने में दिक्कत, बुखार, चक्कर, गला सूजने जैसी परेशानियां देखी गई हैं। इस स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं।

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