इंदाैर
पूर्व कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ काे बर्खास्त किए जाने के 18 दिन बाद भी देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी काे नया कुलपति नहीं मिल सका है। इससे यूनिवर्सिटी में सब कुछ ठप पड़ा है। इससे यूनिवर्सिटी की 55 साल की साख अाैर सीईटी (विवि की प्रवेश परीक्षा) देने वाले 17 हजार छात्रों का भविष्य दांव पर है। उधर, अपनी पसंद का कुलपति चुनने की होड़ में प्रदेश सरकार और राजभवन की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि प्रभारी कुलपति की जो नियुक्ति पहले ही दिन हाे जाना थी, वह ढाई सप्ताह बीतने के बाद भी नहीं हो पाई है।

इससे पहले यूनिवर्सिटी एक दिन भी कुलपति के बिना नहीं रही। सवाल यूनिवर्सिटी के संचालन के एक्ट पर भी है। यूनिवर्सिटी एक्ट 1973 में धारा-52 लगाकर कुलपति को बर्खास्त करने के बाद शासन द्वारा तीन नाम राजभवन भेजे जाने की परंपरा का जिक्र तो है, लेकिन कोई ठोस नियम नहीं है। यही वजह है कि सरकार और राजभवनके बीच टकराव की स्थिति बन गई है। तीन बार कुलपति रहे डॉ. राजकमल का कहना है कि सीनियर मोस्ट डीन या प्रो. को पहले ही दिन चार्ज दिया जा सकता था।

हमने तीसरी बार रिमाइंडर भेजा : हमने तीसरी बार कुलाधिपति को रिमाइंडर भेजा है कि कुलाधिपति अपने अधिकार से प्रभारी कुलपति की नियुक्ति तो कर दें। संभागायुक्त या किसी भी सीनियर प्रोफेसर, डीन को प्रभारी कुलपति का दायित्व सौंप दें, ताकि सीईटी का निर्णय हो सके। - जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री

Source : Agency