अवैध बसूली और महिला पत्रकार से बदतमीजी करने के आरोप में विभाग ने किया निलंबित

इटारसी। रेल्वे जंक्शन पर अवैध रूप से खानपान का कारोबार धड़ल्ले से जारी है, और इस कार्य में लगे अवैध वेंडर भी बेखौफ होकर रेल्वे स्टेशन और टे्रनों में खाना सप्लाई करते है, क्योंकि इनको रेल सुरक्षा में लगी एजेंसियों का संरक्षण प्राप्त है, और अवैध खानपान के इस कारोबार में आरपीएफ के जवान अवैध बसूली करते है, और जब कभी वेंडर उनके मुताबिक उन्हें बसूली नही देते है, तो मारपीट की नौबत तक आ जाती है।
    ऐसा ही कुछ मामला 12 बंगला  क्षेत्र में आरपीएफ जवान और वेंडर के बीच तथाकथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। यहाँ सबसे बड़ी बात है, यह वीडियो जिस महिला पत्रकार बना रही थी, उनके ऐसा करने पर आरपीएफ जवान ने न केवल उनके  साथ बदतमीजी की, बल्कि उनका प्रेस कार्ड छीनकर अभ्रद व्यवहार भी किया। जिसकी शिकायत महिला पत्रकार ने जीआरपी पोस्ट में आवेदन देकर की है।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए और वीडियो वायरल होने के बाद आरपीएफ अस्टिसटेंड कमांडेंट ने आरपीएफ जवान जगदीश भदौरिया को निलंबित कर दिया है, साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है, जांच के बाद ही हकीकत सामने आयेगी।  
    ज्ञात हो कि रेल जंक्शन पर अवैध वेंडर और रेल सुरक्षा में लगे जवानों के बीच अवैध खानपान के कारोबार और अवैध बसूली को लेकर हमेशा सांठगाठ चलती रहती है, और यही कारण है कि आये दिन इनके बीच विवाद भी होते रहते है। जिन आरक्षकों को इनका हिस्सा नही मिलता है, वह  अवैध  वेंडरों पर कार्यवाही करते है, या फिर मारपीट भी करते है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई पत्रकार इन सब करतूतों को उजागर करने की कोशिश करता है, यह उन्हें भी धमकाने एवं अभ्रद  व्यवहार करने से नही चूकते है।  
    यह कोई पहला मामला  नही है जब आरपीएफ के जवानों ने पत्रकारों से बदसलूकी की है, जब-जब इनके कारनामों को जनता के बीच लाने की कोशिश की जाती है, यह पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश करके, झूठे प्रकरण में केस दर्ज कर जेल में डालने की धमकी तक दे डालते है।
    आरपीएफ जवान और वेंडर के बीच मारपीट के बाद अवैध वेंडर नीतेश चौरसिया का एम.एल.सी.टेस्ट कराया गया है, जिससे यह पुष्ठि तो हो गई कि उसके साथ मारपीट हुई। विभाग द्वारा जवान को निलंबित करके मामले को कुछ दिन के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, लेकिन अब मुख्य प्रश्र यह है कि रेल जंक्शन पर कब तक यह अवैध खानपान का कारोबार चलता रहेगा? क्या रेल सुरक्षा में लगे आरक्षक ऐसे ही अवैध बसूली के लिए मारपीट करते रहेंगे? क्या इस अवैध कारोबार एवं अवैध बसूली के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकार सुरक्षित रहेंगे, क्या उनके साथ आगे ऐसी कोई अभ्रदता न हो इसके लिए विभाग को कोई ठोस कार्यवाही अवैध वेंडरों और आरक्षकों पर करनी चाहिए, जिससें पत्रकार स्वतंत्र रूप से निडर होकर इनके खिलाफ अपनी पत्रकारिता कर सके।