प्रदेश में शासकीय वाहनों का दुरूपयोग कोई नई बात नही है। यहाँ सरकारी महकमा इनका उपयोग निजी कामों के लिए करता है। कही शासकीय वाहनों का उपयोग शादी में, तो कहीं घूमने-फिरने के लिए किया जाता है। जबकि इनका खर्चा सरकार के खातें में जाता है। यह सबसे बड़ी बात यह है कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े 108 एम्बुलेंस जैसे वाहनों को भी नही छोड़ा जाता है, जबकि ऐसे वाहनों की आवश्यकता कब किस मरीज को पड़ जाये कहा नही जा सकता है, बाजवूद कई बार ऐसे वाहन शादियों में बारात लाने-जाने में दिखाई देते है।
    कुछ दिन पूर्व ही एक ऐसा ही मामला सामने आया है निजी कार्यक्रम सामाजिक शोभायात्रा में फारेस्ट रिजर्व की जंगल सफारी का उपयोग किया गया है, जहाँ बकायदा जंंगल सफारी में बैठाकर यात्रा निकाली जा रही है। यह देखने वाली बात यह है कि पूरे देश में चुनावी माहौल है, और ऐसे में आचार संहिता लगी हुई, इस दौरान तो सरकारी वाहनों का निजी कार्यो में उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है। यहाँ तक सांसद एवं प्रत्याशी भी इनका उपयोग नही कर सकते है, जबकि जो निजी (प्राईवेट)वाहन है उन्हें ही खुद सरकारी कामों में लगा दिया जाता है, लेकिन यहाँ कुछ उल्ट ही देखने को मिल रहा है। जंगलों पर्यटकों को घूमने के लिए जहाँ जंगल सफारी के लिए कई दिनों पहले बुकिंग करानी पड़ती है, इसके बावजूद कई बार उन्हें यह आसानी  से नही मिलती है, वही जंगल सफारी सामाजिक कार्य में आसानी से किस मिल गई यह बात समझ से परे है?