भोपाल
दमोह उपचुनाव की जीत के बाद कांग्रेस ने कई मायनों में राहत की सांस ली है। कांग्रेस की इस जीत ने जहां उसे अब यह भरोसा हो गया है कि अब उसके विधायकों की तोड़फोड़ करना इतना आसान न होगा, वहीं उसकी जीत ने कमलनाथ की रणनीति एवं उनके नेतृत्व को मजबूत करने का काम किया है।

कमलनाथ ने दमोह जीतने के लिए चुनाव के पांच महीने पहले ही रणनीति बनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने कुछ विधायकों और पूर्व मंत्रियों को दमोह की जिम्मेदारी दी। वहीं उन्होंने दमोह के स्थानीय नेताओं को भी एक करने का प्रयास किया। दमोह के नेताओं की इच्छा के अनुसार ही उन्होंने अजय टंडन को टिकट दिया। दरअसल कमलनाथ इस चुनाव के जरिए यह भी संदेश देना चाहते थे कांग्रेस छोड़कर जाने वालों का जनता भी साथ नहीं दे रही है। यह संदेश इस चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस ने दिया भी है।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि जनता ने दमोह उपचुनाव के जरिए संदेश दिया है कि अब मतदाता दलबदल करने वालों को सबक सीखा रही है। इससे विधायक भी अपनी मूल पार्टी को बीच में छोड़कर न जाएंगे। यह लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत भी है।

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