नई दिल्ली
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन शनिदेव की जयंती मनाई जाती है। इस दिन भावुका अमावस्या और वटसावित्री अमावस्या व्रत भी किया जाता है। जिन लोगों को शनि की साढ़ेसाती, ढैया, महादशा, अंतर्दशा आदि चल रही हो वे इस दिन शनि देव की मूर्ति पूजा, शनि मंत्रों का जप, होम, शनि स्तोत्र, शनि कवच का पाठ करें और शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान करें। शनि जयंती के दिन गुरुवार, रोहिणी नक्षत्र, धृति योग, नाग करण रहेगा। इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों वृषभ राशि में रहेंगे। इस दिन वृषभ राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, राहु रहने से चतु‌र्ग्रही योग भी बन रहा है। कैसे करें शनि पूजा ? शनैश्चरी जयंती के दिन नवग्रहों में न्यायाधिपति और देवता का दर्जा प्राप्त शनिदेव का विशेष पूजन किया जाता है। इस दिन शनि मंदिर में शनिदेव का तैलाभिषेक करें। काले तिल, काले उड़द, लोहा, काले कपड़े और सरसों या तिल के तेल शनि देव को अर्पित करें।

 नीले पुष्प अर्पित करें और तिल से बनी मिठाइयों का नैवेद्य लगाएं। मंदिर में ही बैठकर शनि स्तोत्र या शनि शांति मंत्रों का जाप करें। साढ़ेसाती ढैया वाले क्या करें ? इस समय शनि का गोचर स्वराशि मकर में चल रहा है। धनु राशि पर साढ़ेसाती का अंतिम ढैया, मकर पर द्वितीय और कुंभ राशि पर प्रथम ढैया चल रहा है। इसके अलावा लघुकल्याणी ढैया मिथुन और तुला राशि पर चल रहा है। इसलिए इन पांचों राशि के जातकों को शनि की शांति के विशेष प्रयास करने चाहिए। शनि 23 मई से वक्री भी हुए हैं। धनु, मकर, कुंभ, मिथुन और तुला राशि वाले लोग शनि जयंती के दिन शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक करें या पंडित से करवाएं। इसके बाद शनि शांति मंत्रों से हवन करवाएं। गरीबों, दिव्यांगों, अनाथों को भोजन करवाएं। शनि मंत्र ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का आप करते हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें। पीपल के पेड़ में मीठा दूध अर्पित करें और उसके नीचे बैठकर शनि स्तवराज का पाठ करें। शनि अमावस्या के दिन हनुमान चालीसा या हनुमान बाहु अष्टक का पाठ करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। 

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