भोपाल
भाजपा सरकार में हुए घपले-घोटालों की कलाई खोलना शुरू हो गया है। माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के बाद भोज मुक्त विश्वविद्यालय में हो रहे फर्जीवाड़े की शिकायत ईओडब्ल्यू में दर्ज की गई है। इसमें कुलपति जयंत सोनवलकर की पीएचडी में नकल, नियम विरुद्ध नियुक्ति, पदोन्नति, भ्रष्टाचार के साथ अन्य बिंदुओं पर 972 पेज की शिकायत में कई आरोप लगाए गए हैँ। प्रारंभिक जांच के बाद विवि से संबंधित बिन्दुओं पर रिकॉर्ड लिया जाएगा। उसके परीक्षण के बाद ही एफआईआर की जाएगी। 

एमसीयू में हुई गड़बड़ियों में ईओडब्ल्यू द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के बाद भोज विवि में हुए घोटालों की ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई है। 972 पेज की शिकायत में विवि में कई पदों पर नियम विरुद्ध नियुक्ति, नियमों को दरकिनार कर पदोन्नति देने, विवि स्तर पर कम्प्यूटर, उपकरण, स्टेशनरी सहित अन्य खरीदी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर शासन को करोड़ों रुपए की क्षति पहुंचाई है। इसका लाभ विवि में पदस्थ अधिकारियों ने लिया है। भोज विवि में यह सभी घोटाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए हैं। वहीं शिकायत को लेकर डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण चौहान और कुलपति सोनवलकर में काफी खलबली मची हुई है। ईओडब्लयू से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों अधिकारी ईओडब्ल्यू में अपनी आमद भी दर्ज करा चुके हैं। 

ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के मुताबिक 972 पेज की इस शिकायत के तमाम बिन्दुओं पर जांच शुरू हो गई है। जांच पूरी होने के बाद विवि संबंधित बिन्दुओं पर रिकॉर्ड लिया जाएगा। दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा कि कहां क्या गड़बड़ी हुई है। इसके बाद किन मामलों में अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया जाएगा और किन बिन्दुओं पर विभागीय जांच कराई जाएगी तय होगा। शिकायत के हर पहलू को गंभीरता से देखा जा रहा है। 

कमलाकर ने भी की थी नकल
कुलपति सोनवलकर की पीएचडी में काफी फर्जीवाड़ा किया है। शिकायत में बताया गया है कुलपति सोनवलकर ने अपनी पीएचडी में चार किताबों से नकल की है। अवधे प्रताप विवि रीवा के पूर्व कार्यपरिषद सदस्य संजय चौरडिया एवं जितेंद्र वागड़ी ने शिकायत पत्र में उन किताबों को भी उजागर किया है, जिससे थीसिस में नकल की गई है। हालांकि उनकी पीएचडी की जांच भोपाल संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव द्वारा की जा रही है। उनकी रिपोर्ट भी जल्द शासन के सुपुर्द कर दी जाएगी। सोनवलकर ने देवी अहिल्या विवि इंदौर से पीएचडी की है। शिकायत के बावजूद विवि ने उनकी पीएचडी निरस्त और उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। ज्ञात हो कि भोज मुक्त विवि के पूर्व कुलपति डॉ. कमलाकर सिंह की पीएचडी निरस्त कर शासन ने उन्हें कुलपति पद से हटाते हुए 10 साल के लिए निलंबित कर दिया था। वर्तमान में वे प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति में बतौर अध्यक्ष पदस्थ हैं। 

Source : Agency